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बीकानेर न्यूज़ : फसल 100 फीसदी खराब, गिरदावरी में महज 15-20 प्रतिशत! भाटी ने उठाए सवाल

पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी बोले—कागजी आंकड़ों से नहीं चलेगा काम, खेत-खेत जाकर हो नुकसान का आकलन

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। कोलायत क्षेत्र में फसल खराबे को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने प्रशासन की गिरदावरी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। भाटी का कहना है कि कई गांवों…

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बीकानेर न्यूज़ : फसल 100 फीसदी खराब, गिरदावरी में महज 15-20 प्रतिशत! भाटी ने उठाए सवाल

बीकानेर। कोलायत क्षेत्र में फसल खराबे को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने प्रशासन की गिरदावरी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। भाटी का कहना है कि कई गांवों में किसानों की फसल 80 से 100 प्रतिशत तक खराब हो चुकी है, जबकि पटवारी स्तर पर महज 15 से 20 प्रतिशत खराबे की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। भाटी ने सोमवार को बीकानेर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और हालातों के बारे में बताया।

भाटी ने कहा कि खेत में खड़ी फसल की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिपोर्ट में जमीन-आसमान का अंतर है। ऐसे में यदि नुकसान का सही आकलन नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में किसान उचित मुआवजे से वंचित रह सकते हैं।

कातरा रोग ने बढ़ाई किसानों की परेशानी-कोलायत विधानसभा क्षेत्र के सियाणा, नैणिया, बाला, खाखूसर, हदां, लम्माणा भाटियान, लम्माणा मुलवान, खिन्दासर, नान्दड़ा, भेलू, दासौड़ी, खजोड़ा और खारा लोहान सहित कई क्षेत्रों में मौठ, ग्वार और तिल की फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई किसानों के अनुसार कातरा रोग के कारण खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है।

भाटी की मांग—खेतवार हो गिरदावरी-भाटी ने प्रशासन से मांग की है कि फसल खराबे का आकलन गांव या पटवार हलके के औसत के आधार पर नहीं, बल्कि प्रत्येक खेत में जाकर किया जाए। उन्होंने प्रभावित किसानों के खेतों की दोबारा जांच कर वास्तविक नुकसान दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस किसान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है, उसके खेत में 15-20 प्रतिशत खराबा दर्ज करना न्यायसंगत नहीं है। किसानों को राहत तभी मिल पाएगी, जब गिरदावरी वास्तविक नुकसान के आधार पर की जाएगी।

अकाल जैसे हालात को लेकर भी चेताया-भाटी ने दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान में संभावित अकाल जैसे हालात को लेकर भी सरकार को आगाह किया है। उन्होंने समय रहते किसानों और पशुपालकों के लिए चारा, पानी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। अब किसानों की नजर प्रशासन पर है कि खेतों में दिखाई दे रही फसल बर्बादी सरकारी रिकॉर्ड में कितनी दर्ज होती है और प्रभावित किसानों को राहत कब तक मिलती है।

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