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बीकानेर नगर निगम चुनाव: नामांकन में 24 घंटे बाकी, फिर भी कांग्रेस-भाजपा के पत्ते बंद !

टिकट बांटने से ज्यादा बगावत रोकने की चिंता, 45 वार्डों में उलझा गणित; भाजपा के वार्ड 75 पर अटका पेंच, कांग्रेस के 73-74 समेत कई वार्डों में घमासान

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। नगर निगम चुनाव में नामांकन का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। प्रत्याशियों के नामांकन के लिए अब महज 24 घंटे का वक्त बचा है, लेकिन बीकानेर नगर निगम की सत्ता पर नजर गड़ाए बैठी…

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बीकानेर नगर निगम चुनाव: नामांकन में 24 घंटे बाकी, फिर भी कांग्रेस-भाजपा के पत्ते बंद !

-पीयूष पुरोहित

बीकानेर। नगर निगम चुनाव में नामांकन का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। प्रत्याशियों के नामांकन के लिए अब महज 24 घंटे का वक्त बचा है, लेकिन बीकानेर नगर निगम की सत्ता पर नजर गड़ाए बैठी कांग्रेस और भाजपा अभी तक अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक नहीं कर पाई हैं। दोनों दलों के बैठकों का दौर जारी है और दावेदारों की धड़कनें तेज हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है—सूची तैयार नहीं है या फिर सूची तैयार है, लेकिन उसे जारी करने का साहस नहीं जुट पा रहा?

दरअसल, टिकट वितरण से ज्यादा दोनों दलों को टिकट कटने के बाद होने वाली बगावत का डर सता रहा है। यही वजह है कि जिन वार्डों में दो या उससे ज्यादा मजबूत दावेदार हैं, वहां अंतिम फैसला बेहद सावधानी से किया जा रहा है।

भाजपा में 15 वार्डों ने बढ़ाया टेंशन-भाजपा में करीब 15 वार्ड अभी भी पार्टी नेतृत्व के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड 75 की है। यहां टिकट को लेकर पेंच ऐसा फंसा हुआ है कि पार्टी के स्थानीय नेताओं से लेकर बड़े पदाधिकारियों तक की नजर इस वार्ड पर टिकी है।एक खास प्रत्याशी उतारने के नाम पर विधायक नाराज है।

वार्ड 75 के अलावा करीब एक दर्जन अन्य वार्डों में भी दावेदारों के बीच खींचतान बताई जा रही है। पार्टी के सामने चुनौती यह है कि एक नाम पर मुहर लगाते ही दूसरा दावेदार बगावत का रास्ता न पकड़ ले। यानी भाजपा के लिए असली सवाल अब यह नहीं है कि ‘टिकट किसे दें?’, बल्कि सवाल यह है कि ‘टिकट किसे दें कि बाकी नाराज होकर घर न बैठें या मैदान में न उतरें?’

कांग्रेस में 30 वार्डों का गणित उलझा-कांग्रेस की स्थिति भी कम दिलचस्प नहीं है। पार्टी में करीब 30 वार्डों पर अभी भी मंथन चल रहा है। कई जगह दावेदारों की संख्या ज्यादा है तो कहीं स्थानीय समीकरण टिकट का गणित बदल रहे हैं, सबसे ज्यादा नजर वार्ड 73 और 74 पर है। इन दोनों वार्डों में टिकट को लेकर कांग्रेस के सामने बड़ी दुविधा बताई जा रही है। इसके साथ ही वार्ड 2 और वार्ड 58 भी पार्टी के लिए खासे पेचीदा बने हुए हैं। इनके अलावा करीब दो दर्जन वार्डों में नामों को लेकर अंतिम दौर की मशक्कत जारी है। कांग्रेस नेतृत्व जिताऊ चेहरे के साथ-साथ यह भी देख रहा है कि टिकट नहीं मिलने वाले दावेदार चुनाव में पार्टी के खिलाफ मोर्चा न खोल दें।

‘एक टिकट, कई दावेदार’ ने बढ़ाई बेचैनी-दोनों पार्टियों में इस समय सबसे ज्यादा बेचैनी उन वार्डों में है जहां एक टिकट के लिए कई दावेदार पूरी ताकत लगा रहे हैं। दिनभर पार्टी नेताओं के घर और कार्यालयों के चक्कर, फोन पर लगातार संपर्क और समर्थकों के जरिए दबाव बनाने का खेल जारी है। दावेदारों की नजर सिर्फ पार्टी की सूची पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि आखिरी वक्त में किसका नाम कटता है और किसका नाम जुड़ता है।

सूची आई तो शुरू होगा असली खेल !

राजनीतिक जानकारों की नजर में टिकट की घोषणा के बाद ही नगर निगम चुनाव का असली रंग सामने आएगा। अभी तक जो दावेदार एक ही पार्टी के टिकट के लिए एकजुट दिखाई दे रहे हैं, सूची आने के बाद उनमें से कुछ के तेवर बदल सकते हैं। किसी को टिकट मिला तो समर्थक जश्न मनाएंगे और किसी का टिकट कटा तो पार्टी कार्यालय से लेकर चुनाव मैदान तक नाराजगी के सुर सुनाई दे सकते हैं। इसी कारण दोनों दल आखिरी समय तक डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं।

अब 24 घंटे में खुलेगा पूरा खेल-नामांकन की समय सीमा बेहद करीब है। ऐसे में अब कांग्रेस और भाजपा को अपने पत्ते खोलने ही होंगे। सवाल सिर्फ उम्मीदवारों की सूची का नहीं है। सवाल यह है कि सूची जारी होने के बाद कितने दावेदार पार्टी के साथ खड़े रहते हैं और कितने बागी बनकर मैदान में उतरते हैं।

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