सत्यदीप की औपन्यासिक कृति 'चोटी रै गांठ' का लोकार्पण
विमर्श की दृष्टि से 'चोटी रै गांठ' ब्राह्मण विमर्श का पहला भारतीय उपन्यास - हरीश बी. शर्मा
श्री डूंगरगढ़। मरूभूमि शोध संस्थान द्वारा आयोजित राजस्थानी उपन्यास 'चोटी रै गांठ' का लोकार्पण और पुस्तक चर्चा समारोह राष्ट्र भाषा हिंदी प्रचार समिति के संस्कृति भवन में रविवार सुबह जाने-माने साहित्यकारों व साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति में उल्लास पूर्वक सम्पन्न हुआ।
मुख्य अतिथि मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि ऐतिहासिक उपन्यास के रचाव में गल्प का समावेश सबसे बड़ी सृजनात्मक चुनौती है। इतिहास के प्रमाणित तथ्यों की विश्वसनीयता बनाए रखते हुए कथा की रोचकता, पात्रों की संवेदनात्मक प्रस्तुति और कल्पना का संतुलित प्रयोग ही उपन्यास की सफलता का आधार बनता है। इतिहास और कल्पना के इसी संतुलन से पठनीय व कालजयी रचना जन्म लेती है।