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न पद मांगा, न टिकट… सालों संगठन की सेवा की, अब बीजेपी ने ‘पापड़सा’ को वार्ड 58 से बनाया प्रत्याशी

जनसंघ के दीपक से शुरू हुआ सफर… आपातकाल देखा, बीजेपी को बढ़ते देखा, लेकिन कभी कुछ नहीं माँगा

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। राजनीति में कई चेहरे ऐसे होते हैं जो पद मिलने के बाद पार्टी के साथ दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ कार्यकर्ता ऐसे भी होते हैं जो पार्टी के लिए काम करते हैं और बदले में कुछ…

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न पद मांगा, न टिकट… सालों संगठन की सेवा की, अब बीजेपी ने ‘पापड़सा’ को वार्ड 58 से बनाया प्रत्याशी

बीकानेर। राजनीति में कई चेहरे ऐसे होते हैं जो पद मिलने के बाद पार्टी के साथ दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ कार्यकर्ता ऐसे भी होते हैं जो पार्टी के लिए काम करते हैं और बदले में कुछ मांगते नहीं। बीकानेर के बीजेपी कार्यकर्ता सतीश किराडू ‘पापड़सा’ की कहानी कुछ ऐसी ही है।

जनसंघ के दौर से संगठन का दामन थामने वाले ‘पापड़सा’ ने पार्टी के संघर्ष का वह दौर भी देखा है, जब कार्यकर्ता गिनती में कम थे और संसाधन भी सीमित थे। आज उसी संगठन को मजबूत होते और सत्ता के शिखर तक पहुंचते देखने वाले ‘पापड़सा’ को बीजेपी ने इस बार नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 58 से अपना प्रत्याशी बनाकर बड़ा सम्मान दिया है।

जब नेता मंच पर बैठते थे, ‘पापड़सा’ बिछाते थे दरी -‘पापड़सा’ की राजनीतिक कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि उन्होंने संगठन में काम को कभी छोटा नहीं समझा। कभी बूथ पर बैठना, कभी बैठक की व्यवस्था करना तो कभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बैठने के लिए दरी बिछाना—जो जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा से निभाया। उन्होंने जनसंघ का दौर देखा, आपातकाल का दौर देखा और फिर बीजेपी को धीरे-धीरे मजबूत होते देखा। पार्टी जब शुरुआती संघर्ष से निकलकर देश की बड़ी राजनीतिक ताकत बनी, तब भी ‘पापड़सा’ की पहचान वही रही—एक सामान्य कार्यकर्ता। न पद की दौड़, न टिकट की मांग और न ही किसी बड़े पद की इच्छा। यही वजह है कि वार्ड 58 से टिकट मिलने के बाद उनके पुराने साथी इसे “संगठन की सेवा का इनाम” बता रहे हैं।

जिसने कभी टिकट नहीं मांगा, पार्टी ने उसी को टिकट दे दिया-बीजेपी ने वार्ड 58 से सतीश किराडू को प्रत्याशी बनाकर एक ऐसा संदेश भी दिया है, जिसकी चर्चा पार्टी के भीतर हो रही है। विधायक जेठानंद व्यास के प्रयासों से ‘पापड़सा’ को टिकट मिलने के बाद उनके समर्थकों में खासा उत्साह है। पार्टी का निर्णय सामने आने के बाद ‘पापड़सा’ बेहद उत्साहित हैं। वर्षों तक संगठन के छोटे-बड़े कामों में सक्रिय रहने वाले इस कार्यकर्ता के लिए यह मौका किसी राजनीतिक पद से कम नहीं है।

पुराने साथियों ने कहा—जमीनी कार्यकर्ता को मिला सम्मान

‘पापड़सा’ को टिकट मिलने की खबर सामने आते ही उनके पुराने साथी भी उत्साहित नजर आए। पुराना शहर मंडल के पूर्व अध्यक्ष आनंद व्यास ने पार्टी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे इस निर्णय से बेहद खुश हैं। उन्होंने विधायक जेठानंद व्यास के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यकर्ता को मौका मिलना संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए सम्मान की बात है।

बीजेपी नेता राम कुमार व्यास, शेखर आचार्य, आनंद जोशी, नवनीत पुरोहित " मनामन, नरेश जोशी ,किशोर आचार्य, प्रियंकर कोचर, राजेंद्र गहलोत और दुर्गा शंकर आचार्य ‘टनू’ सहित अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी टिकट का स्वागत किया और विधायक जेठानंद व्यास का आभार जताया।

जनसंघ के ‘पापड़सा’ अब वार्ड 58 में मांगेंगे वोट

राजनीतिक सफर का यह मोड़ अपने आप में खास है। जिस कार्यकर्ता ने कभी नेताओं के लिए दरी बिछाई, वही अब खुद चुनावी मैदान में नेता की भूमिका में नजर आएगा। जिस संगठन के लिए वर्षों तक बिना किसी अपेक्षा के काम किया, उसी संगठन का झंडा लेकर अब ‘पापड़सा’ वार्ड 58 के मतदाताओं के बीच जाएंगे। बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच इस टिकट को लेकर एक बात खास तौर पर चर्चा में है—“पद के पीछे नहीं भागे, पार्टी के पीछे चलते रहे… आखिर पार्टी खुद उनके दरवाजे तक टिकट लेकर पहुंच गई।”

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