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बीकानेर न्यूज़ : टिकट मिला नहीं तो कटा कैसे? रांका को लेकर बीजेपी निकाय सह प्रभारी का बड़ा बयान

रांका ने कहा—बीजेपी के दो नेताओं के कहने पर भरा पर्चा, फोन कर पर्चा भरने को कहा था

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। नगर निगम बीकानेर चुनाव में वार्ड 75 से बीजेपी के टिकट को लेकर चल रहा सियासी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष महावीर रांका को बीजेपी का टिकट…

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बीकानेर  न्यूज़ :  टिकट मिला नहीं तो कटा कैसे? रांका को लेकर बीजेपी निकाय सह प्रभारी का बड़ा बयान

बीकानेर। नगर निगम बीकानेर चुनाव में वार्ड 75 से बीजेपी के टिकट को लेकर चल रहा सियासी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। यूआईटी के पूर्व अध्यक्ष महावीर रांका को बीजेपी का टिकट काटने के मामले में अब पार्टी के निकाय चुनाव सह प्रभारी महावीर सैनी के बयान ने पूरे घटनाक्रम को नया ट्विस्ट दे दिया है। रांका की टिकट कटने की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए बीजेपी निकाय चुनाव प्रभारी महावीर सैनी ने कहा, “जब टिकट मिला ही नहीं तो कटा कैसे?” उनके इस बयान के बाद वार्ड 75 का मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

उन्होंने ने स्पष्ट किया कि महावीर रांका ने पार्टी से टिकट के लिए आवेदन किया था और उनका नाम संभावित उम्मीदवारों के पैनल में भी शामिल था। हालांकि, अंतिम रूप से तैयार की गई प्रत्याशियों की सूची में रांका का नाम शामिल नहीं किया गया। सैनी ने रांका को पार्टी का अच्छा कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि पार्टी ने जो निर्णय किया है,उन्होंने निर्णय का स्वागत किया है।

टिकट नहीं मिला, फिर रांका ने क्यों भरा पर्चा?

इधर बीजेपी सह प्रभारी के बयान के बीच खुद महावीर रांका ने सोशल मीडिया के एक प्लेट फोरम से बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखकर मामले को और दिलचस्प बना दिया है। रांका के अनुसार, उन्होंने अपनी ओर से अचानक चुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया था, बल्कि बीजेपी के दो प्रमुख नेताओं के फोन आने के बाद उन्होंने वार्ड 75 से नामांकन दाखिल किया। रांका ने बताया कि बीजेपी नेता सत्य प्रकाश आचार्य और बीकानेर शहर बीजेपी अध्यक्ष सुमन छाजेड़ की ओर से उन्हें फोन आया था। रांका का कहना है कि दोनों नेताओं के कहने पर ही उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने के लिए पर्चा भरा।

दो अलग अलग बयानों ने खड़े किये सवाल

रांका के बयान ने के बाद इस प्रकरण में कई सवाल खड़े किये जा रहे हैं। यदि पार्टी की अंतिम सूची में उनका नाम नहीं था, तो फिर उन्हें नामांकन दाखिल करने के लिए किस स्तर पर चुनाव लड़ने का भरोसा दिया गया? क्या स्थानीय नेताओं को पार्टी के टिकट संबंधी फैसले की जानकारी नहीं थी? और यदि जानकारी थी तो रांका को नामांकन दाखिल करने के लिए फोन क्यों किए गए?

एक तरफ पार्टी का फैसला, दूसरी तरफ नेताओं के फोन का दावा-वार्ड 75 का घटनाक्रम बीजेपी के भीतर टिकट वितरण को लेकर चल रही चर्चाओं को भी सामने ला रहा है। एक तरफ पार्टी प्रभारी का कहना है कि रांका को टिकट मिला ही नहीं, इसलिए टिकट काटे जाने की बात सही नहीं है। दूसरी तरफ रांका का दावा है कि पार्टी के ही नेताओं के कहने पर उन्होंने नामांकन दाखिल किया।

असली सवाल यही है -ऐसे में अब असली सवाल यही है कि वार्ड 75 में महावीर रांका चुनाव लड़ने काआखिर संदेश कहां से और किस स्तर पर दिया गया ? पार्टी की अंतिम सूची में फ़ाइनल होने से पहले जल्दबाजी किसने दिखाई। कुल मिलाकर चर्चाओं के बाजार में इस नए ट्विस्ट से वार्ड 75 की चुनावी कहानी को और ज्यादा रोचक बना दिया है।

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