जयपुर। राजस्थान में कृषि क्षेत्र को केवल खेती तक सीमित रखने के बजाय कृषि प्रसंस्करण, भंडारण और कृषि व्यवसाय से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 के तहत प्रदेश में 617 एग्रो प्रोजेक्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें करीब 1255 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में से 338 प्रोजेक्ट्स के लिए 119 करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर की जा चुकी है।
किसानों को अपनी उपज के बेहतर मूल्य की उम्मीद-कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के बढ़ने से किसानों के लिए अपनी उपज को सीधे कच्चे माल के रूप में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण कर बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़ सकते हैं। नीति के तहत अनाज, तिलहन, दलहन, मसाले, मूंगफली, कपास और दूध जैसी कृषि उपज से जुड़ी प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसानों को भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ने के अधिक विकल्प मिलें तथा फसल कटाई के तुरंत बाद कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी कम हो।
वेयरहाउस बनाने में सबसे ज्यादा रुचि- कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति के तहत वेयरहाउस स्थापित करने में सबसे अधिक रुचि दिखाई गई है। कुल 226 वेयरहाउस स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र में अनाज और तिलहन से जुड़ी इकाइयों की संख्या भी उल्लेखनीय है। आंकड़ों के अनुसार 82 अनाज प्रसंस्करण और 76 तिलहन प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इसके अलावा दलहन, मसाले, मूंगफली, कपास, पशु आहार और दूध प्रसंस्करण से जुड़ी इकाइयां भी इस योजना का हिस्सा हैं।
