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राजस्थान में किसानों के लिए बड़ी खबर, खरीफ फसल बीमा को लेकर नए दिशा-निर्देश

पॉलिसी जारी होने से पहले होगा फसल का सत्यापन, गलत बीमा पॉलिसियों पर लगेगी रोक

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

जयपुर। राजस्थान के किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। खरीफ 2026 से राज्य में फसल बीमा पॉलिसी जारी करने से पहले फसल और बीमा संबंधी…

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राजस्थान में किसानों के लिए बड़ी खबर, खरीफ फसल बीमा को लेकर नए दिशा-निर्देश

जयपुर। राजस्थान के किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। खरीफ 2026 से राज्य में फसल बीमा पॉलिसी जारी करने से पहले फसल और बीमा संबंधी विवरण का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। राजस्थान कृषि विभाग की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य बीमा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, गलत पॉलिसियों पर रोक लगाना और फसल खराब होने के बाद क्लेम के समय आने वाली परेशानियों को कम करना है।

पॉलिसी बनाने से पहले होगी जांच-नए प्रावधानों के तहत किसान के आवेदन, भूमि रिकॉर्ड और वास्तव में बोई गई फसल का मिलान करने के बाद ही बीमा पॉलिसी को मंजूरी दी जाएगी। फसल के बीमा योग्य होने और किसान के बीमित भूमि से संबंधित हित का सत्यापन भी किया जाएगा।

कृषि विभाग के अनुसार, पहले कई मामलों में पॉलिसी तैयार करते समय किसान की वास्तविक बोई गई फसल और बीमित फसल में अंतर सामने आने से बाद में क्लेम के समय विवाद पैदा होते थे। इसी समस्या को दूर करने के लिए अब पॉलिसी जारी करने के स्तर पर ही सत्यापन पर जोर दिया गया है।

भौतिक सत्यापन के साथ तकनीक का भी इस्तेमाल-वास्तविक बोई गई फसल और बीमित फसल के मिलान के लिए भौतिक सत्यापन, क्रॉप हेल्थ मॉनिटरिंग सर्वे और तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि किसी क्षेत्र में बीमित फसल का क्षेत्रफल औसत बुवाई क्षेत्र से अधिक पाया जाता है तो संबंधित पॉलिसियों की अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर जिला कलेक्टर और कृषि विभाग के अधिकारियों के समन्वय से ई-गिरदावरी और डीसीएस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भी विवरण का मिलान किया जाएगा।

गलत पॉलिसी की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की-नए दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गलत तरीके से स्वीकृत पॉलिसी से उत्पन्न वित्तीय या अन्य भार की जिम्मेदारी संबंधित बीमा कंपनी की होगी। पॉलिसियों के अनुमोदन और निरस्तीकरण की रिपोर्ट जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी के समक्ष भी प्रस्तुत की जाएगी। इस व्यवस्था से किसानों को उम्मीद है कि फसल खराब होने के बाद क्लेम के समय दस्तावेजों और बीमित फसल को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी।

किसान को कितना प्रीमियम देना होता है?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान का प्रीमियम सीमित रखा गया है। आधिकारिक PMFBY जानकारी के अनुसार खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए किसान का अधिकतम हिस्सा खरीफ में 2 प्रतिशत और रबी में 1.5 प्रतिशत है। वार्षिक वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए यह अधिकतम 5 प्रतिशत है।

गलत जानकारी देने से बचें किसान-किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमा करवाते समय भूमि, बोई गई फसल, क्षेत्रफल और अन्य विवरण सही दर्ज करवाएं। केंद्र सरकार के अनुसार PMFBY में आवेदन की गुणवत्ता जांच और सत्यापन किया जाता है, जिसमें भूमि, बीमित क्षेत्र, बोई गई फसल और किसान की पहचान से जुड़े विवरण का मिलान शामिल है। किसी किसान को बीमा आवेदन या क्लेम से संबंधित परेशानी होने पर कृषि रक्षक पोर्टल/हेल्पलाइन 14447 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध है।

किसानों के हित में उठाया गया कदम

कृषि विभाग का कहना है कि खरीफ 2026 से लागू होने वाली यह व्यवस्था फसल बीमा योजना में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के हितों की रक्षा करेगी। पॉलिसी बनने से पहले ही फसल और भूमि का सत्यापन होने से भविष्य में क्लेम के दौरान होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विषय:#Rajasthan
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