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राजस्थान में कृषि क्षेत्र को मिल रहा नया सहारा, 617 एग्रो प्रोजेक्ट्स से 1255 करोड़ का निवेश

कृषि प्रसंस्करण से लेकर वेयरहाउस तक बढ़ा निवेश, किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए अनुदान का प्रावधान

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जयपुर। राजस्थान में कृषि क्षेत्र को केवल खेती तक सीमित रखने के बजाय कृषि प्रसंस्करण, भंडारण और कृषि व्यवसाय से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार…

राजस्थान में कृषि क्षेत्र को मिल रहा नया सहारा, 617 एग्रो प्रोजेक्ट्स से 1255 करोड़ का निवेश

जयपुर। राजस्थान में कृषि क्षेत्र को केवल खेती तक सीमित रखने के बजाय कृषि प्रसंस्करण, भंडारण और कृषि व्यवसाय से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 के तहत प्रदेश में 617 एग्रो प्रोजेक्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें करीब 1255 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में से 338 प्रोजेक्ट्स के लिए 119 करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर की जा चुकी है।

किसानों को अपनी उपज के बेहतर मूल्य की उम्मीद-कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के बढ़ने से किसानों के लिए अपनी उपज को सीधे कच्चे माल के रूप में बेचने के बजाय उसका प्रसंस्करण कर बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर बढ़ सकते हैं। नीति के तहत अनाज, तिलहन, दलहन, मसाले, मूंगफली, कपास और दूध जैसी कृषि उपज से जुड़ी प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसानों को भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ने के अधिक विकल्प मिलें तथा फसल कटाई के तुरंत बाद कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी कम हो।

वेयरहाउस बनाने में सबसे ज्यादा रुचि- कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति के तहत वेयरहाउस स्थापित करने में सबसे अधिक रुचि दिखाई गई है। कुल 226 वेयरहाउस स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र में अनाज और तिलहन से जुड़ी इकाइयों की संख्या भी उल्लेखनीय है। आंकड़ों के अनुसार 82 अनाज प्रसंस्करण और 76 तिलहन प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इसके अलावा दलहन, मसाले, मूंगफली, कपास, पशु आहार और दूध प्रसंस्करण से जुड़ी इकाइयां भी इस योजना का हिस्सा हैं।

किसानों को परियोजना लागत पर 50 फीसदी तक अनुदान-इस नीति के तहत कृषि प्रसंस्करण उद्योग और आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए पात्र किसानों एवं किसान संगठनों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है। इसकी अधिकतम सीमा एक करोड़ रुपये तक रखी गई है। अन्य पात्र उद्यमियों को परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक, अधिकतम 50 लाख रुपये तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। यानी किसान यदि समूह बनाकर या पात्र परियोजना के माध्यम से कृषि आधारित उद्योग शुरू करना चाहते हैं तो उन्हें सरकार की ओर से वित्तीय सहायता का लाभ मिल सकता है।

किसानों को ब्याज में भी राहत-योजना में केवल पूंजीगत अनुदान ही नहीं, बल्कि ऋण पर ब्याज में राहत का भी प्रावधान है। किसानों और उनके समूहों को सावधि ऋण लेने पर 6 प्रतिशत की दर से पांच साल तक ब्याज अनुदान देने की व्यवस्था बताई गई है। किसानों के लिए ब्याज अनुदान की अधिकतम सीमा एक करोड़ रुपये तक निर्धारित की गई है।वहीं सामान्य उद्यमियों को पांच साल तक पांच प्रतिशत की दर से ब्याज अनुदान का प्रावधान है। आदिवासी क्षेत्रों, पिछड़े जिलों तथा अनुसूचित जाति-जनजाति, महिला और 35 वर्ष से कम उम्र के उद्यमियों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान का भी प्रावधान बताया गया है।

कृषि से उद्योग और रोजगार तक बढ़ेगा दायरा-कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खेत से मंडी तक सीमित रहने के बजाय यदि कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और भंडारण बढ़ता है तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। वेयरहाउस, पैकेजिंग, ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और परिवहन जैसी गतिविधियों से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। राजस्थान में कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की ओर से अनुदान और अन्य प्रोत्साहनों की जानकारी राज किसान पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में कृषि, उद्यानिकी और कृषि विपणन विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।

Topics:#Rajasthan
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