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राजस्थान में जैविक खेती को बढ़ावा, ‘राज किसान जैविक’ एप से बाजार तक पहुंच हुई आसान

किसानों और खरीदारों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की पहल, जैविक उपज की बिक्री के लिए घर बैठे संपर्क की सुविधा

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जयपुर। राजस्थान में जैविक खेती को बढ़ावा देने और जैविक उत्पाद तैयार करने वाले किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग की ओर से ‘राज किसान जैविक’ मोबाइल एप…

राजस्थान में जैविक खेती को बढ़ावा, ‘राज किसान जैविक’ एप से बाजार तक पहुंच हुई  आसान

जयपुर। राजस्थान में जैविक खेती को बढ़ावा देने और जैविक उत्पाद तैयार करने वाले किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विभाग की ओर से ‘राज किसान जैविक’ मोबाइल एप विकसित किया गया है। इस एप के माध्यम से जैविक उत्पादों के क्रेता और विक्रेता सीधे एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं। राजस्थान कृषि विभाग की वेबसाइट पर भी ‘राज किसान जैविक’ को जैविक उत्पादों की खरीद-बिक्री से संबंधित मोबाइल एप के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

बाजार तलाशने की परेशानी होगी कम-जैविक खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अपनी उपज के लिए उचित खरीदार तलाशना है। जैविक अनाज, सब्जियां, मसाले और फलों का उत्पादन करने वाले किसानों को कई बार स्थानीय बाजार तक ही सीमित रहना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए तैयार किए गए इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसान अपनी जैविक उपज, फसल, क्षेत्रफल और बिक्री के लिए उपलब्ध उत्पादन की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद यह जानकारी पंजीकृत खरीदारों को दिखाई देती है। खरीदार संबंधित किसान से संपर्क कर उपज की कीमत और अन्य शर्तों पर बातचीत कर सकते हैं।

प्रमाणित किसानों के लिए विशेष व्यवस्था-‘राज किसान जैविक’ एप में व्यक्तिगत किसान के साथ-साथ प्रमाणित किसान समूहों को भी पंजीकरण की सुविधा दी गई है। किसान को विक्रेता के रूप में पंजीकरण कराने के बाद अपनी जैविक खेती और प्रमाणीकरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होती है। कृषि विभाग के अनुसार किसान द्वारा अपलोड किए गए जैविक प्रमाण-पत्र का संबंधित प्रमाणीकरण संस्था से अनुमोदन किया जाता है। अनुमोदन के बाद किसान अपनी जैविक कृषि भूमि, फसल और बिक्री योग्य उपज का विवरण एप पर दर्ज कर सकता है।

किसान खुद तय कर सकता है बिक्री दर-एप की महत्वपूर्ण सुविधा यह है कि किसान अपनी उपज की बिक्री दर भी दर्ज कर सकता है। इससे खरीदार को उत्पाद, उपलब्ध मात्रा और अपेक्षित कीमत की जानकारी पहले से मिल जाती है। इसके बाद खरीदार एप में उपलब्ध ‘कॉल’ सुविधा के माध्यम से किसान से सीधे संपर्क कर सकता है। दोनों पक्ष आपस में बातचीत और मोलभाव करके खरीद-बिक्री की शर्तें तय कर सकते हैं।

जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग से किसानों को उम्मीद-लोगों में स्वास्थ्य और खाद्य गुणवत्ता को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ जैविक उत्पादों की मांग भी बढ़ी है। ऐसे में जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए सीधे खरीदारों तक पहुंच बनाना महत्वपूर्ण हो गया है। राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर आधारित कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को प्रोत्साहित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।

20 हजार से अधिक किसानों से जुड़ा था जैविक उत्पादन का नेटवर्क-कृषि विभाग की इस एप से संबंधित पूर्व जानकारी के अनुसार राजस्थान राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था से जुड़े 90 जैविक उत्पादक समूहों में 20 हजार से अधिक किसान जुड़े हुए थे। ये किसान जैविक अनाज, सब्जियां, मसाले और फल जैसे उत्पाद तैयार कर रहे थे। उस समय एप पर 160 किसानों और 29 खरीदारों के पंजीकरण की जानकारी भी विभाग ने दी थी।

Topics:#Rajasthan
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