
जयपुर, 1 नवंबर । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को पूर्ण करने में आज के स्कूली विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। 20 साल बाद यही युवा इसकी नींव होंगे। आज के स्कूली बच्चों को कुशल, दक्ष, जिम्मेदार नागरिक और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना अति आवश्यक है। यह विचार केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने विद्या भवन सोसायटी द्वारा आयोजित सीड-2 कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को बदलते विश्व के अनुरूप ज्ञान, मूल्यों और प्रायोगिक कौशल को उपलब्ध कराना जरूरी है। यह स्कूलों के माध्यम से ही संभव है।उन्होंने मिशन लाइफ पर फोकस करते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली की ओर प्रवृत्त करने का आह्वान किया और इसके लिए अध्यापकों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत के लिए और वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान के लिए अध्यापकों को बच्चों को अभी से सीख देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के मिशन लाइफ, कैच द रैन, नशा मुक्ति अभियान, एक पेड़ माँ के नाम जैसी योजनाओ का हर विद्यालय प्रभावी क्रियान्वयन करे। बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए हमें आज से ही सकारात्मक प्रयास करने होंगे। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन एवं संस्कार आदतें जीवनभर साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्य की तरह हो विद्यालय विकास लक्ष्य निर्धारित हो जिसमें प्रतिवर्ष ऊर्जा खपत मे कमी, जल खपत मे कमी, जल बचत, कचरा उत्सर्जन मे कमी का आंकलन हो ।
