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Bikaner News : महापौर की कुर्सी पर वैश्य समाज को कांग्रेस ने नहीं दिया मौका,नवरतन डागा ने निर्दलीय पर्चा भरकर जताई नाराजगी

बीकानेर में 42 पार्षदों के बहुमत के बाद कल्ला ने भतीजे अनिल कल्ला पर चला दांव

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर उठे विवाद ने अब सामाजिक प्रतिनिधित्व और वंशवाद का मुद्दा खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने 80 सदस्यीय नगर निगम में 42…

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Bikaner News : महापौर की कुर्सी पर वैश्य समाज को कांग्रेस ने नहीं दिया मौका,नवरतन डागा ने निर्दलीय पर्चा भरकर जताई नाराजगी

मुख्य बातें

  1. बीजेपी के विरोध के बाद वैश्य समाज की थी कांग्रेस से उम्मीद
  2. पूर्व मंत्री डॉ. बीड़ी कल्ला पर पार्टी में वंशवाद चलाने का आरोप
  3. कांग्रेस के भीतर सामाजिक प्रतिनिधित्व और वंशवाद का मुद्दा उठा

बीकानेर। बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर उठे विवाद ने अब सामाजिक प्रतिनिधित्व और वंशवाद का मुद्दा खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने 80 सदस्यीय नगर निगम में 42 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, लेकिन महापौर पद के लिए पार्टी ने वैश्य समाज के किसी पार्षद को मौका देने के बजाय वार्ड 73 से निर्वाचित पार्षद और पूर्व मंत्री डॉ. बीड़ी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है।

इस फैसले के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया है वार्ड 50 से कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद और वैश्य समाज के नेता नवरतन डागा, जिनका नाम महापौर पद के दावेदारों में चर्चा में था, ने अनिल कल्ला के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है। नवरतन डागा ने पूर्व मंत्री डॉ. बीड़ी कल्ला पर पार्टी में वंशवाद चलाने का आरोप लगाया है। बीजेपी के घोषित प्रत्याशी डॉ सुरेंद्र शेखावत ने भी डॉ कल्ला पर वंशवाद की बेल को हरा करने का आरोप मढ़ा है।

बीजेपी के विरोध के बाद वैश्य समाज की थी कांग्रेस से उम्मीद

नगर निगम चुनाव से पहले महावीर रांका को बीजेपी का टिकट नहीं मिलने के घटनाक्रम के बाद वैश्य समाज के कुछ नेताओं और समर्थकों की ओर से कांग्रेस के पक्ष में जाने की अपीलें सामने आई थीं। ऐसे माहौल में समाज के एक वर्ग को उम्मीद थी कि चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस महापौर पद में वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व दे सकती है।

चुनाव परिणाम में कांग्रेस को 42 सीटों के साथ बहुमत मिलने के बाद महापौर पद के लिए पार्टी के भीतर कई नामों पर चर्चा हुई। इनमें वैश्य समाज से जुड़े पार्षदों के नाम भी सामने आए। लेकिन अंततः कांग्रेस ने अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाया।

नवरतन डागा की बगावत ने बढ़ाई हलचल

अनिल कल्ला के नाम की घोषणा के बाद नवरतन डागा का निर्दलीय नामांकन कांग्रेस के लिए नई चुनौती बन गया है। डागा वार्ड 50 से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए हैं और चुनाव में उन्होंने 1,288 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।

डागा के मैदान में उतरने से महापौर चुनाव में कांग्रेस के भीतर मतों के संभावित विभाजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। बीकानेर में महापौर चुनाव 21 सितंबर को होना है।

'प्रतिनिधित्व' बनाम 'राजनीतिक फैसला' का सवाल

वैश्य समाज से जुड़े लोगों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि जिस समाज से चुनाव के दौरान कांग्रेस को समर्थन मिलने की उम्मीद बनी और जिसके कुछ निर्वाचित पार्षद महापौर पद की दौड़ में थे, उसे इस बार अवसर क्यों नहीं मिला।

वहीं कांग्रेस की ओर से अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने को पार्टी का संगठनात्मक और राजनीतिक निर्णय माना जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कल्ला के नाम को पार्टी के भीतर पर्याप्त समर्थन मिलने के बाद उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया गया।

अब निगाहें 18 सितंबर पर

महापौर चुनाव के लिए 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद ही यह साफ होगा कि नवरतन डागा मैदान में बने रहते हैं या कांग्रेस के भीतर कोई समझौता होता है।

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