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बीकानेर निगम चुनाव : अल्पसंख्यक समाज की अब उपमहापौर पद पर नजर !

महापौर पद पर अनिल कल्ला के नाम के बाद प्रतिनिधित्व को लेकर उठे सवाल

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। बीकानेर नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद अब महापौर के साथ-साथ उपमहापौर पद को लेकर भी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस ने 42…

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बीकानेर निगम चुनाव :  अल्पसंख्यक समाज की अब उपमहापौर पद पर नजर !

मुख्य बातें

  1. कांग्रेस के बहुमत में मुस्लिम पार्षदों की मौजूदगी भी अहम
  2. 13 मुस्लिम पार्षदों की जीत
  3. अब उपमहापौर को लेकर चर्चा

बीकानेर। बीकानेर नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद अब महापौर के साथ-साथ उपमहापौर पद को लेकर भी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस ने 42 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं कांग्रेस के टिकट पर अल्पसंख्यक समाज से जुड़े 13 पार्षद चुनाव जीतकर निगम में पहुंचे हैं।

महापौर पद के लिए कांग्रेस ने अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में अल्पसंख्यक समाज से जुड़े कांग्रेस पार्षदों और समर्थकों के बीच अब इस बात की चर्चा है कि यदि महापौर पद सामान्य राजनीतिक समीकरणों के तहत कांग्रेस के खाते में जाता है, तो उपमहापौर पद पर अल्पसंख्यक समाज को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना क्या होगी।

13 मुस्लिम पार्षदों की जीत

इस चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मुस्लिम समाज से जुड़े 13 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इनमें वार्ड 15 से अब्दुल वाहिद, 18 से मकसूद अहमद, 21 से रिजवान, 25 से मोहम्मद हुसैन, 30 से अब्दुल सत्तार, 39 से सलमान खान, 53 से अनीस अली, 55 से जावेद, 62 से अकबर अली, 64 से जावेद, 66 से नसीमा बानो, 78 से जुलेखा बानो और 80 से मो. अतीक शामिल हैं।

इनके अलावा चुनावी परिणामों की स्थानीय राजनीतिक व्याख्या में कई ऐसे वार्डों का भी उल्लेख किया जा रहा है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण रही। हालांकि किसी एक सामाजिक समूह के समर्थन को पूरे चुनाव परिणाम का एकमात्र कारण मानना उचित नहीं होगा; कांग्रेस को विभिन्न वर्गों के मतदाताओं का समर्थन मिला और इसी के परिणामस्वरूप पार्टी 42 सीटों तक पहुंची।

.... अब उपमहापौर को लेकर चर्चा

महापौर पद के लिए कांग्रेस ने वार्ड 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। उनके नामांकन के बाद अब कांग्रेस के भीतर उपमहापौर पद के लिए संभावित नामों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस से जुड़े पार्षदों की बैठक में पूर्व विधानसभा क्षेत्र से किसी पार्षद को उपमहापौर पद देने का फॉर्मूला चर्चा में आया है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक उपमहापौर पद के लिए किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

यही वजह है कि अल्पसंख्यक समाज के बीच भी अब प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चाएं तेज हैं। समाज के 13 पार्षद कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए हैं और ऐसे में उपमहापौर पद पर किसी अल्पसंख्यक पार्षद को अवसर दिए जाने की संभावनाओं पर निगाहें टिकी हैं।

महापौर नहीं तो उपमहापौर?

कांग्रेस के भीतर महापौर पद के लिए अल्पसंख्यक समाज से जुड़े पार्षदों के नाम भी चर्चा में रहे थे। स्थानीय रिपोर्टों में जावेद पड़िहार और मकसूद अहमद समेत अन्य नामों का उल्लेख महापौर पद की दावेदारी के संदर्भ में किया गया था।

अब जब अनिल कल्ला कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी हैं, तो राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अल्पसंख्यक समाज को महापौर पद पर प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की स्थिति में उपमहापौर पद के जरिए प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। हालांकि यह अभी राजनीतिक चर्चा है और अंतिम फैसला कांग्रेस संगठन को करना है।

16 वार्डों के समीकरण का भी जिक्र

स्थानीय राजनीतिक चर्चा में यह दावा भी किया जा रहा है कि करीब 16 वार्डों में अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण रही। हालांकि इस संख्या को आधिकारिक चुनावी आंकड़े के रूप में प्रस्तुत करने के लिए निर्वाचन आयोग की वार्डवार मतदाता-सांख्यिकी और मतदान पैटर्न का अलग से सत्यापन आवश्यक है।

इसलिए इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस की 42 सीटों वाली जीत में 13 मुस्लिम पार्षदों की जीत एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व है, जबकि कई मिश्रित आबादी वाले वार्डों में विभिन्न सामाजिक समूहों के मतदाताओं ने कांग्रेस उम्मीदवारों को समर्थन दिया।

अब फैसला कांग्रेस के हाथ में

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद महापौर पद को लेकर तस्वीर काफी हद तक सामने आ चुकी है। अब उपमहापौर पद पार्टी के लिए अगला महत्वपूर्ण निर्णय है।

एक तरफ पार्टी के सामने क्षेत्रीय संतुलन का सवाल है, तो दूसरी तरफ विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की अपेक्षाएं भी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में उपमहापौर के नाम को लेकर होने वाली घोषणा पर सभी की निगाहें रहेंगी।

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