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नगर निगम चुनाव : विधायकों के विरोध को दरकिनार कर वार्ड 75 से महावीर रांका को बीजेपी का टिकट !

केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम के वीटो पावर से रांका को टिकट,फैसले ने बढ़ाई सियासी हलचल

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। नगर निगम चुनाव में बीजेपी के टिकट वितरण को लेकर बीकानेर की सियासत में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। वार्ड 75 से पूर्व यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका को बीजेपी का टिकट…

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नगर निगम चुनाव : विधायकों के विरोध को दरकिनार कर वार्ड 75 से महावीर रांका को बीजेपी का टिकट !

मुख्य बातें

  1. अपने वार्ड में महिला आरक्षण ने बदला रांका का चुनावी मैदान
  2. विधायकों के विरोध के बावजूद रांका की एंट्री
  3. बीजेपी के सामने अब डैमेज कंट्रोल की चुनौती

बीकानेर। नगर निगम चुनाव में बीजेपी के टिकट वितरण को लेकर बीकानेर की सियासत में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। वार्ड 75 से पूर्व यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका को बीजेपी का टिकट मिलने का दावा सामने आया है। हालांकि बीजेपी की अधिकृत प्रत्याशियों की सूची अभी जारी नहीं हुई है, लेकिन खुद महावीर रांका ने सोशल मीडिया के माध्यम से वार्ड 75 से चुनाव मैदान में उतरने की जानकारी साझा की है। रांका की इस घोषणा के बाद बीजेपी के भीतर टिकट वितरण को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

सबसे खास बात यह है कि बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास और बीकानेर पूर्व की पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी की ओर से रांका की उम्मीदवारी का विरोध किए जाने की चर्चा थी। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं ने प्रदेश की टिकट वितरण समिति के समक्ष भी अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी। ऐसे में विरोध के बावजूद रांका का नाम सामने आने से बीजेपी के भीतर शक्ति संतुलन और टिकट वितरण में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

विधायकों के विरोध के बावजूद रांका की एंट्री-वार्ड 75 से महावीर रांका की दावेदारी सामने आने के बाद से ही स्थानीय बीजेपी में हलचल थी। वार्ड के स्थानीय समीकरण, संभावित दावेदारों और रांका की बाहरी उम्मीदवार के रूप में एंट्री को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आने की चर्चा रही।

बताया जा रहा है कि पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास और पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी ने भी रांका के नाम को लेकर अपनी आपत्ति पार्टी के सामने रखी थी। इसके बावजूद अब रांका की ओर से टिकट मिलने की सूचना सार्वजनिक किए जाने के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर स्थानीय विरोध के बावजूद रांका के नाम पर मुहर कैसे लगी?

हालांकि विधायकों के विरोध और टिकट को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल राजनीतिक सूत्रों और पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के रूप में ही देखा जा रहा है।

‘अर्जुनराम फैक्टर’ की चर्चा—क्या केंद्रीय प्रभाव पड़ा भारी?

रांका को टिकट मिलने की खबर के साथ ही बीजेपी के सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा केंद्रीय कानून मंत्री और बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल की भूमिका को लेकर हो रही है। राजनीतिक चर्चाओं में कहा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर विरोध के बावजूद रांका के पक्ष में केंद्रीय नेतृत्व का समर्थन महत्वपूर्ण रहा।

इसी वजह से सियासी गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या ‘अर्जुनराम फैक्टर’ ने स्थानीय विरोध को पीछे छोड़ दिया? कुछ राजनीतिक हलकों में इसे ‘अर्जुनराम का वीटो पावर’ तक कहा जा रहा है। हालांकि बीजेपी की ओर से ऐसी किसी ‘वीटो पावर’ की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लिहाजा यह फिलहाल राजनीतिक चर्चा और अंदरूनी समीकरणों की अटकलों तक ही सीमित है।

फिर भी रांका का नाम सामने आने के बाद यह बहस जरूर तेज हो गई है कि टिकट वितरण में स्थानीय नेतृत्व की राय भारी पड़ी या केंद्रीय नेतृत्व का प्रभाव।

अपने वार्ड में महिला आरक्षण ने बदला रांका का चुनावी मैदान-महावीर रांका के वार्ड 75 से चुनाव लड़ने के पीछे भी एक अहम राजनीतिक कारण बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, रांका का अपना वार्ड इस बार महिला आरक्षित हो गया है। ऐसे में उनके लिए उसी वार्ड से चुनाव लड़ने का रास्ता बंद हो गया।

इसके बाद रांका ने बीकानेर शहर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 75 से चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी शुरू की। लेकिन नया वार्ड उनके लिए राजनीतिक रूप से पूरी तरह नया मैदान है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर उन्हें ‘बाहरी उम्मीदवार’ के तौर पर देखा जा रहा है।

वार्ड में पहले से सक्रिय स्थानीय दावेदारों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा है कि जब क्षेत्र में लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता और दावेदार मौजूद हैं तो टिकट किसी दूसरे वार्ड से आए नेता को क्यों दिया जाए।

‘बाहरी’ की छवि तोड़ना रांका के सामने बड़ी चुनौती-महावीर रांका बीकानेर की राजनीति में जाना-पहचाना नाम हैं। पूर्व में यूआईटी चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल चुके रांका की शहर की राजनीति में अपनी पहचान और समर्थक वर्ग है।

लेकिन वार्ड 75 का चुनाव उनके लिए अलग चुनौती लेकर आया है। यहां उन्हें सिर्फ विपक्षी उम्मीदवार से मुकाबला नहीं करना होगा, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता भी साबित करनी होगी। टिकट हासिल करना रांका के लिए पहला पड़ाव है। अब उनकी असली परीक्षा इस बात की होगी कि वे वार्ड के स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं, टिकट की दौड़ में शामिल रहे दावेदारों और संभावित नाराज नेताओं को कितनी जल्दी अपने साथ जोड़ पाते हैं।

बीजेपी के सामने अब डैमेज कंट्रोल की चुनौती

यदि टिकट को लेकर नाराज स्थानीय दावेदार और समर्थक खुलकर सामने आते हैं तो बीजेपी के लिए चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है। पार्टी नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती रांका के पक्ष में संगठन को एकजुट रखने और टिकट से नाराज नेताओं को साधने की होगी।

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