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Bikaner News : उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग,प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत तक पहुंचे अल्पसंख्यक नेता

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। नगर निगम उपमहापौर चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने पार्टी की अंदरूनी सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के…

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Bikaner News : उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग,प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत तक पहुंचे अल्पसंख्यक नेता

मुख्य बातें

  1. उपमहापौर चुनाव के बाद उठे सवाल
  2. अल्पसंख्यक नेताओं ने उठाया मुद्दा
  3. महापौर चुनाव के बाद दूसरा बड़ा सवाल

बीकानेर। नगर निगम उपमहापौर चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर क्रॉस वोटिंग के आरोपों ने पार्टी की अंदरूनी सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में अपेक्षित मतदान नहीं होने के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और पार्षदों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंच गया है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस से जुड़े अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने उपमहापौर चुनाव के घटनाक्रम को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क किया है। इन नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के समक्ष अपनी बात रखते हुए चुनाव में हुई कथित क्रॉस वोटिंग की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। साथ ही पूरे घटनाक्रम की जानकारी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक भी पहुंचाई गई है।

उपमहापौर चुनाव के बाद उठे सवाल

नगर निगम में महापौर चुनाव के बाद उपमहापौर का चुनाव कांग्रेस के लिए भी अहम माना जा रहा था। चुनाव परिणाम आने के बाद मतदान के आंकड़ों को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा शुरू हो गई। कांग्रेस खेमे में इस बात को लेकर सवाल उठे कि पार्टी के पास मौजूद समर्थन के बावजूद सभी वोट अपेक्षित तरीके से क्यों नहीं पड़े।

इसी को लेकर अब कांग्रेस के भीतर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किन पार्षदों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर मतदान किया और इसके पीछे क्या कारण रहे। हालांकि मतदान गुप्त होने के कारण किसी पार्षद के खिलाफ केवल राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर कार्रवाई करना आसान नहीं है।

अल्पसंख्यक नेताओं ने उठाया मुद्दा

मामले में अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं की सक्रियता ने विवाद को और महत्वपूर्ण बना दिया है। उनका कहना है कि यदि पार्टी के पार्षदों ने किसी समझौते या व्यक्तिगत राजनीतिक समीकरण के चलते क्रॉस वोटिंग की है तो संगठन को पूरे मामले की जानकारी जुटानी चाहिए।

नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व से यह भी कहा है कि स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाओं और आरोप-प्रत्यारोप के बजाय पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जानकारी जुटाकर स्थिति स्पष्ट की जाए। उनका जोर इस बात पर है कि पार्टी के निर्वाचित पार्षदों के बीच समन्वय और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर स्पष्ट संदेश जाना चाहिए।

महापौर चुनाव के बाद दूसरा बड़ा सवाल

बीकानेर नगर निगम में महापौर चुनाव के दौरान भी भाजपा के कुछ पार्षदों की कथित क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया था। अब उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस के भीतर उठे सवालों ने नगर निगम की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है।

एक ओर भाजपा अपने पार्षदों की भूमिका को लेकर संगठनात्मक स्तर पर मंथन कर रही है, वहीं कांग्रेस में भी अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि उसके खेमे में किस स्तर पर वोटों का समीकरण बदला।

गुप्त मतदान ने बढ़ाई मुश्किल

उपमहापौर चुनाव में गुप्त मतदान होने के कारण किसी खास पार्षद पर सीधे तौर पर क्रॉस वोटिंग का आरोप साबित करना संगठन के लिए चुनौती है। यही वजह है कि कांग्रेस के स्थानीय नेता फिलहाल पूरे मामले पर खुलकर किसी पार्षद का नाम लेने से बच रहे हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने अब दो सवाल हैं—पहला, क्या वास्तव में कांग्रेस के पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की और दूसरा, यदि ऐसा हुआ तो इसके पीछे स्थानीय राजनीतिक समीकरण क्या रहे?

प्रदेश नेतृत्व की भूमिका पर नजर

मामला प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंचने के बाद अब स्थानीय कांग्रेस नेताओं की नजर प्रदेश नेतृत्व की अगली कार्रवाई पर है। यदि पार्टी नेतृत्व मामले को गंभीरता से लेता है तो स्थानीय नेताओं और पार्षदों से पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी मांगी जा सकती है।

फिलहाल कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपमहापौर चुनाव में वोटों का गणित कैसे बदला और पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी की वजह क्या रही। आने वाले दिनों में प्रदेश नेतृत्व की ओर से इस मामले में कोई बैठक, रिपोर्ट या संगठनात्मक कार्रवाई सामने आती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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