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Bikaner News : भाजपा पार्षदों की बगावत पर क्या होगी कार्यवाही ? महापौर चुनाव के बाद एक नेता और 13 पार्षदों की हुई शिकायत

डॉ. सुरेंद्र शेखावत की ओर से मुख्यमंत्री को बंद लिफाफे में शिकायत दिए जाने की चर्चा

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव के बाद भाजपा के भीतर कथित बगावत और क्रॉस वोटिंग का मामला अब संगठन के लिए बड़ा सवाल बनता जा रहा है। भाजपा के महापौर प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र…

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Bikaner News :  भाजपा पार्षदों की बगावत पर क्या होगी कार्यवाही  ? 
महापौर चुनाव के बाद एक नेता और 13 पार्षदों की हुई शिकायत

मुख्य बातें

  1. महापौर चुनाव में भाजपा को मिली हार ने खड़े किए सवाल
  2. 13 पार्षदों के नाम की शिकायत की चर्चा क्यों?
  3. 6 वोटों का अंतर बना पार्टी के लिए बड़ा सवाल

बीकानेर। बीकानेर नगर निगम के महापौर चुनाव के बाद भाजपा के भीतर कथित बगावत और क्रॉस वोटिंग का मामला अब संगठन के लिए बड़ा सवाल बनता जा रहा है। भाजपा के महापौर प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को बंद लिफाफे में शिकायत दिए जाने की चर्चा ने पार्टी के अंदर हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी राजस्थान के अध्यक्ष मदन राठौर तक भी बात पहुंचे गई है।

सूत्रों के अनुसार, इस शिकायत में एक भाजपा नेता और 13 भाजपा पार्षदों के नाम होने की बात कही जा रही है। हालांकि, शिकायत की पूरी प्रति या उसमें दर्ज नाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इसलिए संबंधित पार्षदों या नेता के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किये गए है।

महापौर चुनाव में भाजपा को मिली हार ने खड़े किए सवाल

बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा के खाते में 27 सीटें आई थीं। कांग्रेस के पास बहुमत के लिए जरूरी 41 के आंकड़े से एक सीट अधिक थी। 21 सितंबर को हुए महापौर चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला को 50 वोट मिले, जबकि भाजपा के डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। गुप्त मतदान होने के कारण किसी पार्षद ने किस उम्मीदवार को वोट दिया, इसकी आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं होती। ऐसे में भाजपा के कुछ पार्षदों द्वारा कथित रूप से कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का आरोप अभी संगठनात्मक जांच का विषय है।

13 पार्षदों के नाम की शिकायत की चर्चा क्यों?

सूत्रों के मुताबिक, महापौर प्रत्याशी डॉ. सुरेंद्र सिंह शेखावत ने महापौर चुनाव के बाद पार्टी नेतृत्व के समक्ष शिकायत रखते हुए एक नेता और 13 पार्षदों पर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है।

बताया जा रहा है कि शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया कि एक नेता जो वसुंधराराजे के राज में महत्वपूर्ण पद पर रह चूका है। इसने बीजेपी को हारने के लिए कांग्रेस और कई जगह निर्दलीयों को आर्थिक मदद की। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भाजपा संगठन की जांच में क्रॉस वोटिंग या पार्टी लाइन के विपरीत मतदान के संबंध में ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित के खिलाफ क्या कदम उठती है।

सूत्रों के अनुसार शिकायत में 13 भाजपा पार्षदों के नाम होने की चर्चा है। यदि यह जानकारी सही पाई जाती है तो पार्टी संगठन को प्रत्येक नाम और उससे जुड़े आरोपों की पुष्टि करनी होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि आरोप किन दस्तावेजों, राजनीतिक गतिविधियों या अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लगाए गए हैं। गुप्त मतदान होने के कारण केवल चुनाव परिणाम के आधार पर किसी विशेष पार्षद को क्रॉस वोटिंग का दोषी ठहराना संभव नहीं है। इसलिए भाजपा के सामने कार्रवाई से पहले तथ्यात्मक जांच की चुनौती होगी।

6 वोटों का अंतर बना पार्टी के लिए बड़ा सवाल

महापौर चुनाव और उपमहापौर चुनाव के बीच भाजपा के वोटों में 10 वोट का अंतर आया। लेकिन असल फर्क 6 वोटो का बताया जा रहा है। बीजेपी के 27 पार्षद और 7 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के बाद भी यह संख्या 34 होती है । उप महापौर चुनाव में बीजेपी को 40 मत मिले ।6 वोटो के अंतर् के कारण कई सवाल उठ रहे है कि क्या कुछ पार्षदों ने महापौर चुनाव में अलग निर्णय लिया और उपमहापौर चुनाव में पार्टी प्रत्याशी का समर्थन किया ? या दोनों चुनावों के राजनीतिक समीकरण अलग अलग थे? आने वाले दिनों में इन सवालों से पर्दा उठेगा । लेकिन फिलहाल सबकी नजरे बीजेपी हाईकमान पर टीकी है, क्या बीजेपी कोई कार्यवाही करेगी या मामला ठंडे बास्ते में जायेगा।

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