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परिसीमन पर विशेष सत्र की अटकलों के बीच खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक की मांग

लोकसभा की 543 सीटें अगले 25 साल तक बरकरार रखने की मांग; राज्यों को प्रस्तावों के अध्ययन के लिए पर्याप्त समय देने पर जोर

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नई दिल्ली। देश में लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष…

परिसीमन पर विशेष सत्र की अटकलों के बीच खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सर्वदलीय बैठक की मांग

Highlights

  1. कांग्रेस की 543 सीटें 25 साल तक बरकरार रखने की मांग
  2. सरकार की ओर से विशेष सत्र की औपचारिक घोषणा नहीं
  3. खरगे के नए पत्र ने इस मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है

नई दिल्ली। देश में लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन के प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई है। खरगे ने कहा कि इस बेहद महत्वपूर्ण विषय पर किसी भी निर्णय से पहले सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।

खरगे ने अपने पत्र में कहा कि राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को सरकार के प्रस्तावों का विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष सत्र में किसी प्रस्ताव को जल्दबाजी में पेश किए जाने के बजाय पहले व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की जरूरत बताई।

विशेष सत्र की संभावना से बढ़ी हलचल-खरगे का यह पत्र केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने एक टेलीविजन साक्षात्कार में संसद की एक और बैठक बुलाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया था। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई कि सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से विशेष सत्र की कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।

खरगे ने पत्र में यह भी सवाल उठाया कि मानसून सत्र का अभी तक औपचारिक रूप से सत्रावसान क्यों नहीं किया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि इसे संसद की संभावित अगली बैठक से जोड़कर देखा जा रहा है।

543 सीटें 25 साल तक बरकरार रखने की मांग-कांग्रेस अध्यक्ष ने परिसीमन को लेकर पार्टी का रुख भी स्पष्ट किया। उन्होंने मांग की कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए। साथ ही राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के मौजूदा आवंटन को भी अगले 25 वर्षों तक कायम रखने की मांग की है।

खरगे ने इसके अलावा 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की मांग रखी है। कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है।

दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का मुद्दा-परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की ओर से भी चिंता जताई जाती रही है। आशंका यह है कि यदि लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण मुख्य रूप से जनसंख्या के आधार पर होता है तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है, उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। इसी कारण कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस प्रक्रिया में राज्यों के हितों और प्रतिनिधित्व के संतुलन को बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।

परिसीमन का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका सीधा संबंध लोकसभा में राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से है। सीटों की संख्या में बदलाव का असर भविष्य के चुनावी समीकरणों, संसदीय प्रतिनिधित्व और संघीय ढांचे पर पड़ सकता है।

पहले भी हो चुकी है राजनीतिक खींचतान-परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन प्रस्ताव को लेकर अप्रैल में भी संसद में तीखी राजनीतिक बहस हुई थी। 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका था। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। इसके बाद सरकार की ओर से संशोधित प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की चर्चाएं शुरू हुईं।

अब विशेष सत्र की संभावनाओं के बीच खरगे के नए पत्र ने इस मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस चाहती है कि सरकार पहले सभी दलों और राज्यों को विश्वास में ले और उसके बाद ही संसद में कोई प्रस्ताव लाया जाए।

फिलहाल सरकार की ओर से विशेष सत्र की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन खरगे के पत्र के बाद यह साफ है कि परिसीमन आने वाले दिनों में संसद और देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है।

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