Skip to content
हिन्दी
BREAKING

बीकानेर नगर निगम चुनाव : पार्टियों की सूची पर सस्पेंस ! सियासी गलियारों में टिकट से ज्यादा टिकट कटने का डर

Updated:

भाजपा-कांग्रेस में दावेदारों की धड़कनें तेज, सोशल मीडिया की सूचियों ने बढ़ाई बेचैनी; आखिरी वक्त तक नामों पर बरती जा रही है गोपनीयता

बीकानेर नगर निगम चुनाव : पार्टियों की सूची पर सस्पेंस ! सियासी गलियारों में टिकट से ज्यादा टिकट कटने का डर

बीकानेर। नगर निगम चुनाव की सियासी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन सबसे बड़ा सस्पेंस अभी भी टिकट की सूची को लेकर बना हुआ है। भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में दावेदारों की धड़कनें तेज हैं। हर कोई अपने नाम को सूची में देखने के इंतजार में है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही माथापच्ची ने तस्वीर को आखिरी वक्त तक धुंधला कर रखा है। हालात यह हैं कि टिकट मिलने की खुशी से ज्यादा टिकट कटने का डर दावेदारों पर भारी पड़ रहा है।

सोशल मीडिया पर संभावित प्रत्याशियों की सूचियां लगातार वायरल हो रही हैं। किसी सूची में कोई नाम अंदर है तो दूसरी सूची में वही चेहरा गायब नजर आ रहा है। समर्थक अपने-अपने नेताओं के नाम को पक्का बताने में जुटे हैं, लेकिन पार्टियों की ओर से अधिकृत घोषणा नहीं होने के कारण इन सूचियों ने चर्चा ज्यादा और भरोसा कम पैदा किया है।

‘नाम है या नहीं?’—सुबह से फोन, शाम तक माथापच्ची

टिकट के दावेदारों का पूरा दिन इन दिनों एक ही सवाल में गुजर रहा है—“सूची आई क्या?”पार्टी कार्यालयों से लेकर नेताओं के घरों तक फोन घनघना रहे हैं। दावेदार अपने राजनीतिक संपर्कों के जरिए टिकट की स्थिति जानने में जुटे हैं। समर्थकों के बीच भी तरह-तरह के दावे चल रहे हैं। कोई अपने नेता का टिकट पक्का बता रहा है तो कोई उसी वार्ड में दूसरे नाम की पैरवी कर रहा है। सबसे ज्यादा बेचैनी उन वार्डों में है जहां एक से अधिक मजबूत दावेदार मैदान में हैं। यहां पार्टी के लिए किसी एक नाम पर फैसला करना आसान नहीं है, क्योंकि एक को टिकट देने का मतलब दूसरे खेमे को नाराज करना भी हो सकता है।

सूची सार्वजनिक हुई तो बगावत का खतरा !

भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल प्रत्याशी चुनने की नहीं, बल्कि टिकट कटने के बाद असंतोष को संभालने की है। नगर निगम चुनाव स्थानीय स्तर पर लड़ा जाता है और कई वार्डों में प्रत्याशी का व्यक्तिगत प्रभाव पार्टी के चुनाव चिह्न से भी ज्यादा मायने रखता है। ऐसे में टिकट नहीं मिलने वाला मजबूत दावेदार अगर निर्दलीय मैदान में उतरता है तो वह अधिकृत प्रत्याशी के वोट काट सकता है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व अंतिम समय तक नामों को गोपनीय रखने और कई जगह सीधे पार्टी सिंबल सौंपने के विकल्प पर काम करता दिखाई दे रहा है।

सोशल मीडिया की सूची ने मचाया सियासी बवाल

इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रही संभावित सूचियों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। कई नामों को लेकर समर्थक जश्न के मूड में हैं तो कुछ दावेदारों के समर्थक सूची को ही फर्जी बता रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक ही वार्ड के लिए अलग-अलग सूचियों में अलग-अलग नाम सामने आने से भ्रम की स्थिति बन गई है। यही कारण है कि अब दावेदारों के बीच एक ही लाइन चल रही है—“पार्टी की मुहर लगे बिना कुछ भी पक्का नहीं।”

भाजपा में चेहरे, समीकरण और संगठन—तीनों का इम्तिहान

भाजपा के लिए टिकट वितरण में संगठन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण अहम माने जा रहे हैं। पार्टी ऐसे चेहरों की तलाश में है जो वार्ड में मजबूत पकड़ रखते हों और चुनावी मुकाबले में जीत दिलाने की क्षमता रखते हों। लेकिन कई वार्डों में पुराने कार्यकर्ता, पूर्व चुनाव लड़ चुके दावेदार और नए चेहरों के बीच मुकाबला है। ऐसे में एक नाम पर सहमति बनाना पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है।

कांग्रेस में भी दावेदारों की लंबी कतार-कांग्रेस में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। नगर निगम के 80 वार्डों के लिए करीब 600 आवेदन आने की चर्चा ने टिकट की दौड़ की तस्वीर साफ कर दी है। यानी औसतन हर वार्ड में कई दावेदार टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब पार्टी के सामने दोहरी चुनौती है—जिताऊ उम्मीदवार चुनना और बाकी दावेदारों को नाराज होने से रोकना।

आखिरी वक्त में पलट सकता है पूरा खेल-नगर निगम चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दौर में पहुंचने के साथ ही अब हर घंटे सियासी समीकरण बदलने की संभावना है। जिस नाम को आज मजबूत माना जा रहा है, वह अंतिम क्षण में बदल सकता है और जिसे कमजोर समझा जा रहा है, उसके हाथ में पार्टी का सिंबल पहुंच सकता है। इसलिए बीकानेर में फिलहाल संभावित सूची से ज्यादा इंतजार अधिकृत टिकट का है।

अब असली सवाल—किसके हाथ सिंबल, किसके हिस्से इंतजार?

बीकानेर की सियासत में आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम रहने वाले हैं। दावेदारों की नजर पार्टी कार्यालयों पर है, समर्थकों की नजर सोशल मीडिया पर और नेताओं की नजर बगावत के संभावित चेहरों पर।

Share

Comments

0 / 1200

Comments close 30 days after publication.

Related News