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बीकानेर नगर निगम चुनाव में टिकट की सियासत तेज, विधायक व्यास और मंत्री मेघवाल खेमों में बढ़ी जोर आजमाइश

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*पीयूष पुरोहित बीकानेर। नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा में टिकट वितरण को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 80 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी स्तर पर मंथन…

बीकानेर नगर निगम चुनाव में टिकट की सियासत तेज, विधायक व्यास और मंत्री  मेघवाल खेमों में बढ़ी जोर आजमाइश

Highlights

  1. पश्चिम में विधायक की पसंद को तरजीह देने की पैरवी
  2. पूर्व और पश्चिम दोनों क्षेत्रों में मेघवाल की सक्रियता
  3. टिकट के साथ संगठनात्मक शक्ति की परीक्षा

*पीयूष पुरोहित

बीकानेर। नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा में टिकट वितरण को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 80 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी स्तर पर मंथन जारी है। इसी बीच टिकट वितरण में अपनी पसंद के उम्मीदवारों को जगह दिलाने और संगठन में अपने प्रभाव को मजबूत रखने को लेकर बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के खेमों के बीच जोर आजमाइश की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं की अपनी-अपनी पसंद के दावेदारों को टिकट दिलाने को लेकर सक्रियता बढ़ी है। हालांकि भाजपा नेतृत्व की ओर से टिकट वितरण के अंतिम फार्मूले को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।

पश्चिम में विधायक की पसंद को तरजीह देने की पैरवी-बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में नगर निगम के 39 वार्ड हैं। यहां विधायक जेठानंद व्यास स्थानीय संगठन और वार्ड स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को टिकट दिए जाने की पैरवी कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार विधायक का जोर ऐसे उम्मीदवारों पर है, जिनकी संबंधित वार्ड में मजबूत पकड़ हो और जो लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े हुए हों। वे बाहरी व्यक्ति को टिकट देने के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि स्थानीय कार्यकर्ता को मैदान में उतारने से कार्यकर्ताओं में बेहतर समन्वय और चुनावी मजबूती पैदा हो सकती है।

पूर्व और पश्चिम दोनों क्षेत्रों में मेघवाल की सक्रियता-दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री एवं बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल की भूमिका भी टिकट वितरण को लेकर अहम मानी जा रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक मेघवाल बीकानेर पूर्व और पश्चिम दोनों विधानसभा क्षेत्रों में अपनी पसंद के उम्मीदवारों को टिकट दिलाने के लिए सक्रिय हैं।

मेघवाल का राजनीतिक प्रभाव -बीकानेर की भाजपा राजनीति में लंबे समय से मेगवाल का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में उनके समर्थक दावेदार भी टिकट को लेकर उनके संपर्क में बताए जा रहे हैं। जयपुर में प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मेघवाल के रिश्ते और कानून मंत्री का ओहदा पश्चिम के विधायक व्यास के लिए सिरदर्द रहा है।

‘फ्री हैंड’ की चर्चा, लेकिन फैसला संगठन का-भाजपा के भीतर इस बात की चर्चा भी है कि मेघवाल टिकट चयन में अपने स्तर पर अधिक स्वतंत्रता चाहते हैं। हालांकि पार्टी में टिकट वितरण सामूहिक विचार-विमर्श और संगठनात्मक प्रक्रिया के आधार पर होने की बात कही जा रही है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि मेघवाल अपने समर्थित उम्मीदवारों के जरिए निगम में भाजपा का बोर्ड बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। चुनाव में बहुमत हासिल करने के लिए मजबूत और जिताऊ उम्मीदवारों को मैदान में उतारना उनकी प्राथमिकता बताई जा रही है।

80 वार्डों में दावेदारों की लंबी कतार-नगर निगम के 80 वार्डों में टिकट के लिए भाजपा के भीतर बड़ी संख्या में दावेदार सामने आए हैं। पार्टी ने विभिन्न स्तरों पर दावेदारों के संबंध में फीडबैक जुटाया है। वार्ड में सक्रियता, संगठन से जुड़ाव, स्थानीय पकड़, सामाजिक समीकरण और जीत की संभावना जैसे पहलुओं को टिकट चयन में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई वार्डों में एक से अधिक मजबूत दावेदार होने के कारण अंतिम निर्णय चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में विधायक और वरिष्ठ नेताओं की पसंद के साथ संगठन की रिपोर्ट भी टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार बुधवार देर रात तक चले मंथन के बाद बीकानेर पूर्व विधानसभा के कई वार्डों में वार्डों में संभावित उम्मीदवारों के नामों का एक पैनल बन गया है। अंतिम सूची पर प्रदेश नेतृत्व की मुहर लगना बाकी है।

टिकट के साथ संगठनात्मक शक्ति की परीक्षा-नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण सिर्फ प्रत्याशियों के चयन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा के भीतर अलग-अलग नेताओं के संगठनात्मक प्रभाव की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। विधायक जेठानंद व्यास जहां पश्चिम के स्थानीय कार्यकर्ताओं की पैरवी कर रहे हैं, वहीं अर्जुनराम मेघवाल की नजर दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत राजनीतिक समीकरण को बरकरार रखने में है।

अब अंतिम सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि 80 वार्डों में किस नेता की पसंद को कितनी जगह मिली और भाजपा ने टिकट वितरण में स्थानीय संगठन, विधायकों तथा वरिष्ठ नेतृत्व के बीच किस तरह संतुलन साधा। टिकटों की घोषणा के साथ ही बीकानेर की भाजपा राजनीति में चल रही अंदरूनी खींचतान और चुनावी रणनीति की तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो जाएगी।

Source: NSI MEDIA

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