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बीकानेर नगर निगम चुनाव : महापौर की राह पर आगे बढ़ने से पहले ही रांका के टिकट को लेकर बीजेपी के भीतर विरोध के सुर तेज

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जयपुर की बैठक में जेठानंद व्यास ने वार्ड 75 से चुनाव लड़ने पर जताई आपत्ति, सिद्धि कुमारी ने भी मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष के सामने रखा विरोध

बीकानेर नगर निगम चुनाव : महापौर की राह पर आगे बढ़ने से पहले ही रांका के टिकट को लेकर बीजेपी के भीतर विरोध के सुर तेज

Highlights

  1. बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास,पूर्व की विधायक सिद्धि कुमारी है विरोध में
  2. जयपुर भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई बैठक में हुआ विरोध
  3. टिकट पर फैसला नेतृत्व के पाले में

* पीयूष पुरोहित

बीकानेर। नगर निगम चुनाव से पहले बीकानेर भाजपा में टिकट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका इस बार महापौर की कुर्सी पर नजर गड़ाए हुए हैं, लेकिन महापौर की राह पर आगे बढ़ने से पहले ही उनके टिकट को लेकर पार्टी के भीतर विरोध के सुर तेज हो गए हैं।

शुक्रवार को जयपुर स्थित भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई बैठक में बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास ने महावीर रांका के अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 75 से चुनाव लड़ने पर विरोध जताया। बैठक में रांका की उम्मीदवारी को लेकर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और संभावित प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई।

वहीं बीकानेर पूर्व की विधायक सिद्धि कुमारी ने भी मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के समक्ष रांका के टिकट को लेकर अपना एतराज दर्ज कराया। दो प्रमुख नेताओं की आपत्ति के बाद रांका की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा के भीतर चल रही खींचतान अब चर्चा में आ गई है।

महापौर की कुर्सी पर नजर

पूर्व यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका नगर निगम चुनाव के जरिए एक बार फिर बीकानेर की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनकी नजर सिर्फ पार्षद बनने पर नहीं, बल्कि महापौर पद की दौड़ में शामिल होने पर है।

रांका का राजनीतिक सफर पहले भी टिकट और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को लेकर उतार-चढ़ाव से गुजर चुका है। अब निगम चुनाव में उनका टिकट तय होना उनके राजनीतिक भविष्य के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

टिकट पर फैसला नेतृत्व के पाले में

भाजपा में नगर निगम चुनाव के टिकटों को लेकर अंतिम दौर का मंथन चल रहा है। ऐसे में रांका के नाम पर सामने आई आपत्तियों ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक ओर रांका को मजबूत राजनीतिक चेहरा मानने वाले समर्थक हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर से ही विरोध सामने आने लगा है।

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