जयपुर, 26 अक्टूबर। शान्ति एवं अहिंसा विभाग और संस्कृत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयन्ती पर सोमवार को अकादमी के संकुल सभागार में "आदिकवि वाल्मीकि साहित्यिक योगदान एवं लोकमंगल की अवधारणा' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
निदेशक अजय असवाल ने महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए अयोध्या काण्ड में वर्णित 14 सूत्रों को आत्मसात करने एवं समग्र समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जीवनी से छोटी-छोटी एवं अच्छी आदतें अंगीकार करने की आवश्यकता बताई। उन्होने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए वाल्मीकि रचित रामायण में उद्धरित प्रसंगों से प्रेरणा ले कर श्रीराम के आदर्शों एवं चरित्र को अपनी जीवनशैली में अंगीकृत करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि व जगद्गुरु रामानन्दाचार्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन मोहन झा ने श्री राम की समस्त जीवों के लोक मंगल की अवधारणा को साकार करने हेतु किये गये कार्यों के बारे में अवगत कराया।