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शेयर बाजार में गिरावट, IT और रिलायंस के शेयरों ने बढ़ाया दबाव

By AdministratorEdited by: Piyush purohit

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मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट देखने को मिली। IT शेयरों में भारी बिकवाली और रिलायंस इंडस्ट्रीज में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों पर…

शेयर बाजार में गिरावट, IT और रिलायंस के शेयरों ने बढ़ाया दबाव

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट देखने को मिली। IT शेयरों में भारी बिकवाली और रिलायंस इंडस्ट्रीज में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बनाया। कारोबार के अंत में Nifty 50 126.80 अंक यानी 0.52 प्रतिशत गिरकर 24,207.75 पर बंद हुआ, जबकि BSE Sensex 183.15 अंक यानी 0.24 प्रतिशत टूटकर 77,472.94 पर पहुंच गया।

सुबह की तेजी टिक नहीं पाई

बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही थी। Sensex करीब 77,892 अंक पर खुला और दिन के कारोबार में 77,986.84 के उच्च स्तर तक पहुंचा। Nifty भी 24,341.95 के स्तर पर खुला। हालांकि बाद में IT और अन्य प्रमुख शेयरों में बिकवाली बढ़ने से बाजार ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी।

IT शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव

कारोबार में Nifty IT इंडेक्स करीब 1.5 प्रतिशत गिरा, जो प्रमुख सेक्टरों में सबसे बड़ी गिरावट रही। अमेरिकी वीजा नीतियों को लेकर बढ़ी चिंता और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़े आगामी नतीजों को लेकर निवेशकों की सतर्कता ने IT शेयरों पर दबाव बढ़ाया।

विश्लेषकों के अनुसार भारतीय IT कंपनियों के कारोबार में अमेरिकी बाजार और वहां की वीजा नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिका में H-1B वीजा से जुड़ी लागत और आव्रजन नीतियों में संभावित बदलाव से भारतीय IT कंपनियों के मार्जिन और कर्मचारियों की लागत को लेकर चिंता बढ़ी है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज भी दबाव में

बाजार की गिरावट में रिलायंस इंडस्ट्रीज की कमजोरी ने भी योगदान दिया। Reuters के अनुसार कंपनी के शेयर में करीब 1.4 प्रतिशत की गिरावट रही। बाजार में रिलायंस जैसे बड़े वजन वाले शेयरों में कमजोरी का सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ता है।

बैंकिंग और मेटल शेयरों ने संभाला बाजार

हालांकि बाजार में चौतरफा गिरावट नहीं रही। वित्तीय और निजी बैंकिंग शेयरों में करीब 0.5 से 1.1 प्रतिशत तक की मजबूती देखने को मिली। मेटल शेयरों में भी बेहतर प्रदर्शन रहा। इसके बावजूद IT, ऑटो, FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में कमजोरी ने बाजार की कुल दिशा को नीचे रखा।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का भी नहीं मिला फायदा

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसके बावजूद घरेलू बाजार में निवेशकों की सावधानी कम नहीं हुई और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।

निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर

बाजार में निवेशकों की नजर अब अमेरिका के Core PCE inflation data पर भी है। यह आंकड़ा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आगे की रणनीति के संकेत दे सकता है। ब्याज दरों की दिशा का असर वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता का कारण

भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी चुनौती बनी हुई है। Reuters के अनुसार इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके पीछे अन्य एशियाई बाजारों में अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन और AI आधारित कंपनियों में निवेश की बढ़ती रुचि जैसे कारण बताए जा रहे हैं।

आगे बाजार की दिशा पर नजर

बाजार विशेषज्ञों के लिए आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, वैश्विक ब्याज दरों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी। घरेलू कंपनियों के वित्तीय नतीजे भी निवेशकों के लिए प्रमुख संकेतक होंगे।

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