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RBI ने आर्थिक जोखिमों पर जताई चिंता, महंगाई और विकास दर पर नजर

By AdministratorEdited by: Piyush purohit

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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2026 के मासिक बुलेटिन में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं। केंद्रीय बैंक के अनुसार घरेलू अर्थव्यवस्था की…

RBI ने आर्थिक जोखिमों पर जताई चिंता, महंगाई और विकास दर पर नजर

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2026 के मासिक बुलेटिन में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं। केंद्रीय बैंक के अनुसार घरेलू अर्थव्यवस्था की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और मानसून की स्थिति जैसे बाहरी जोखिम आने वाले समय में महंगाई और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।

घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती

RBI के आकलन के अनुसार वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने के बावजूद भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। घरेलू मांग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। बैंक के अनुसार जुलाई में आर्थिक गतिविधियों के कई उच्च-आवृत्ति संकेतकों में मजबूती दिखाई दी।

इसका मतलब है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था में लचीलापन बना हुआ है। हालांकि RBI ने आगे के महीनों में जोखिमों की बारीकी से निगरानी करने की जरूरत बताई है।

वैश्विक व्यापार की अनिश्चितता बड़ी चुनौती

RBI ने वैश्विक व्यापार से जुड़े तनाव को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। विभिन्न देशों की व्यापार नीतियों, टैरिफ और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान का असर भारतीय निर्यात, आयात लागत और कारोबार पर पड़ सकता है।

वैश्विक व्यापार में लंबे समय तक अनिश्चितता रहने पर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और निवेश के फैसलों पर भी असर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा महत्वपूर्ण रहती हैं, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। तेल की कीमतों में तेजी से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और इसका असर परिवहन, उत्पादन तथा अन्य वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है।

RBI ने तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को महंगाई के लिए संभावित जोखिम के रूप में रेखांकित किया है।

मानसून से कृषि और खाद्य महंगाई जुड़ी

RBI ने मानसून की स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना है। मानसून में सुधार से कृषि क्षेत्र के जोखिम कुछ कम हुए हैं और खरीफ फसलों की बुवाई सामान्य स्तर के करीब पहुंची है। हालांकि खाद्य कीमतों में हाल के दिनों में व्यापक स्तर पर बढ़ोतरी देखी गई है, इसलिए खाद्य महंगाई पर निगरानी जरूरी बनी हुई है।

अगर बारिश का वितरण असमान रहता है या प्रमुख फसलों के उत्पादन पर असर पड़ता है तो खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

भू-राजनीतिक तनाव भी चिंता का कारण

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अन्य भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों, व्यापार मार्गों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है। RBI ने ऐसे घटनाक्रमों को भारत की आर्थिक संभावनाओं के लिए प्रमुख बाहरी जोखिमों में शामिल किया है।

महंगाई पर RBI की नजर

अगस्त के बुलेटिन में खाद्य और ईंधन कीमतों को लेकर विशेष सतर्कता दिखाई गई है। जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हुई, जबकि जून में यह 4.38 प्रतिशत थी। हालांकि कोर महंगाई अपेक्षाकृत स्थिर रही, लेकिन खाद्य और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी व्यापक महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

आर्थिक वृद्धि को लेकर फिलहाल भरोसा

जोखिमों के बावजूद RBI का आकलन पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। केंद्रीय बैंक के अनुसार मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां भारत की विकास क्षमता को सहारा दे रही हैं। अगस्त के बुलेटिन में घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और वैश्विक चुनौतियों के बीच उसके लचीलेपन को रेखांकित किया गया है।

Source: NSI MEDIA

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