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नगर निगम चुनाव: बीकानेर में बाड़ाबंदी की तैयारी, कांग्रेस-भाजपा को अपने पार्षदों की चिंता

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बीकानेर। नगर निगम चुनाव के लिए मतदान पूरा होने के साथ ही अब बीकानेर में सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। पार्षदों के चुनाव के बाद अगली चुनौती नगर निगम में बोर्ड बनाने और महापौर…

नगर निगम चुनाव: बीकानेर में बाड़ाबंदी की तैयारी, कांग्रेस-भाजपा को अपने पार्षदों की चिंता

Highlights

  1. दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को अपनों से खतरा का भय
  2. निर्दलीयों पार्षदों की भूमिका भी हो सकती है अहम
  3. 14 सितंबर को खुलेगा असली खेल

बीकानेर। नगर निगम चुनाव के लिए मतदान पूरा होने के साथ ही अब बीकानेर में सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। पार्षदों के चुनाव के बाद अगली चुनौती नगर निगम में बोर्ड बनाने और महापौर चुनाव में बहुमत जुटाने की है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने निर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी की रणनीति पर काम कर सकती हैं।

बीकानेर नगर निगम में 80 वार्ड हैं और महापौर पद सामान्य वर्ग के लिए है। ऐसे में बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण होगा।

एक-एक पार्षद पर नजर

मतदान के बाद अब दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर उन वार्डों पर है जहां मुकाबला कांटे का रहा है। निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों ने कई वार्डों में समीकरणों को रोचक बनाया है। ऐसे में परिणाम आने के बाद निर्दलीयों पार्षदों की भूमिका भी अहम हो सकती है।

प्रदेश के अन्य निकाय क्षेत्रों में मतदान के तुरंत बाद भाजपा और कांग्रेस द्वारा प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी शुरू किए जाने की खबरें सामने आई हैं। दोनों दलों को अपने पार्षदों को विपक्षी खेमे में जाने से रोकने के लिए एकजुट रखने की रणनीति अपनानी पड़ रही है।

शुरू होगी जोड़-तोड़ की राजनीति?

बीकानेर में चुनाव से पहले ही दोनों दलों के भीतर टिकट को लेकर खींचतान और बगावत के मामले सामने आए थे। नामांकन के दौरान कई दावेदारों ने पार्टी टिकट से अलग अपनी ताकत दिखाई थी।

अब परिणाम के बाद तस्वीर और दिलचस्प हो सकती है। यदि भाजपा या कांग्रेस में से किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो महापौर चुनाव के लिए निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में दोनों दल अपने-अपने खेमे को मजबूत रखने के लिए पार्षदों की बाड़ाबंदी कर सकते हैं।

14 सितंबर को खुलेगा असली खेल

नगर निकाय चुनाव की मतगणना 14 सितंबर को है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि बीकानेर नगर निगम में किस दल का पलड़ा भारी है। लेकिन राजनीतिक गतिविधियां परिणाम से पहले ही तेज होने के संकेत हैं।

अब मुकाबला सिर्फ पार्षद बनाने का नहीं, बल्कि बोर्ड और महापौर की कुर्सी तक पहुंचने का है। ऐसे में बीकानेर में अगले कुछ दिन कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

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