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महावीर रांका की मेयर की कुर्सी पर नजर, लेकिन पीछा नहीं छोड़ रही निराशा की छाया !

विधानसभा चुनाव में विधायक सिद्धि कुमारी को टिकट दिए जाने के बाद रांका समर्थकों ने टिकट बदलने की मांग

By AdministratorEdited by: Piyush purohit

Updated:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े बीकानेर के दो प्रमुख पदाधिकारियों का है समर्थन

महावीर रांका की मेयर की कुर्सी पर नजर, लेकिन पीछा नहीं छोड़ रही निराशा की छाया !

Highlights

  1. राजनीतिक सफर में टिकट और संगठन के महत्वपूर्ण पदों को लेकर मिली निराशा

* पीयूष पुरोहित

बीकानेर। बीकानेर नगर निगम चुनाव की सियासी सरगर्मियों के बीच पूर्व यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका एक बार फिर बड़ी राजनीतिक पारी खेलने का मन बनाये हुए हैं। इस बार उनकी नजर महापौर की कुर्सी पर है। हालांकि रांका के राजनीतिक सफर में टिकट और संगठन के महत्वपूर्ण पदों को लेकर मिली निराशाओं की छाया अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

रांका के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने पार्टी के भीतर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारियों के लिए दावेदारी की, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। अब नगर निगम चुनाव में उनके सामने अपनी राजनीतिक पकड़ और जनाधार साबित करने की चुनौती है।

विधानसभा चुनाव में भी दिखाया था शक्ति प्रदर्शन

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से पूर्व की विधायक सिद्धि कुमारी को टिकट दिए जाने के बाद रांका समर्थकों ने टिकट बदलने की मांग को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया था। उस समय रांका का नाम टिकट के प्रमुख दावेदारों में चर्चा में था। समर्थकों के प्रदर्शन से बीकानेर की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ी, लेकिन पार्टी ने अपना फैसला नहीं बदला। अंततः रांका को निराशा हाथ लगी और विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने का मौका नहीं मिला।

संगठन के पद पर भी नहीं बन पाई बात

विधानसभा चुनाव के बाद रांका की नजर भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर भी थी। बीकानेर शहर भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर उनके नाम की चर्चा चली। बताया जाता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े बीकानेर के दो प्रमुख पदाधिकारियों का समर्थन भी उन्हें मिला था। इसके बावजूद संगठन में अंतिम फैसला उनके पक्ष में नहीं गया और वे शहर भाजपा अध्यक्ष नहीं बन पाए।

लगातार दो महत्वपूर्ण मौकों पर उम्मीद पूरी नहीं होने के बाद अब रांका की नजर नगर निगम चुनाव पर है। इस बार वे केवल पार्षद बनने के लिए नहीं, बल्कि चुनाव जीतकर महापौर पद की दौड़ में खुद को मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित करने की कोशिश में हैं।

चार वार्डों से मांगा टिकट

पूर्व यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका ने भाजपा से वार्ड संख्या 8, 12, 75 और 50 से टिकट की दावेदारी जताई है। उनका कहना है कि पार्टी इनमें से जिस भी वार्ड से टिकट देगी, वे चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

रांका के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी उन्हें किस वार्ड से मैदान में उतारती है। चार वार्डों से दावेदारी ने पार्टी के टिकट वितरण को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।

पुराना वार्ड आरक्षित होने से बदली रणनीति

रांका का पुराना वार्ड 28 इस बार महिला सामान्य के लिए आरक्षित हो गया है। ऐसे में उन्हें दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की रणनीति बनानी पड़ी है। यही कारण है कि उन्होंने एक साथ चार वार्डों में अपनी दावेदारी पेश की है।

अब सवाल—ख्वाब होगा पूरा या फिर निराशा?

रांका के राजनीतिक सफर में एक बार फिर ऐसा मोड़ आया है, जहां उम्मीद और निराशा आमने-सामने खड़ी दिखाई दे रही हैं। विधानसभा टिकट की दावेदारी और शहर भाजपा अध्यक्ष पद की कोशिश के बाद अब उनकी नजर महापौर की कुर्सी पर है।

लेकिन महापौर बनने की राह केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है। पहले पार्टी से टिकट हासिल करना, फिर वार्ड चुनाव जीतना और उसके बाद भाजपा के भीतर महापौर पद के लिए समर्थन जुटाना—रांका के सामने तीन बड़ी राजनीतिक चुनौतियां होंगी।

ऐसे में बीकानेर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या इस बार महावीर रांका की राजनीतिक महत्वाकांक्षा मंजिल तक पहुंचेगी या एक बार फिर निराशा उनका पीछा नहीं छोड़ेगी? इसका जवाब भाजपा के टिकट वितरण और नगर निगम चुनाव के परिणाम के बाद ही मिलेगा।

Source: NSI MEDIA

Topics:#Bikaner
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