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BIKANER NEWS : ‘गिरो, गिरते रहो’—डॉ.कल्ला की सोशल मीडिया पोस्ट कविता ने बीकानेर की सियासत में बढ़ाई चर्चाएं

कविता की पंक्तियां—“रुपए के साथ गिरो, चरित्र के साथ गिरो, गर्व के साथ गिरो”

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

बीकानेर। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब बीकानेर की सियासत का केंद्र महापौर चुनाव बन गया है। इसी बीच कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री डॉ. बीड़ी कल्ला…

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BIKANER NEWS : ‘गिरो, गिरते रहो’—डॉ.कल्ला की सोशल मीडिया पोस्ट कविता ने बीकानेर की सियासत में बढ़ाई चर्चाएं

बीकानेर। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब बीकानेर की सियासत का केंद्र महापौर चुनाव बन गया है। इसी बीच कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री डॉ. बीड़ी कल्ला द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई कवि हूबनाथ पाण्डेय की कविता ‘गिरो गिरो! गिरो’ ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को हवा दे दी है। कविता में ‘गिरने’ के बहाने चरित्र, धन, अहंकार, व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों के पतन पर तीखा व्यंग्य किया गया है।

कविता की पंक्तियां—“रुपए के साथ गिरो, चरित्र के साथ गिरो, गर्व के साथ गिरो”—राजनीतिक संदर्भ में पढ़ी जाएं तो भ्रष्टाचार, स्वार्थ और नैतिक पतन पर कटाक्ष के रूप में देखी जा सकती हैं। हालांकि पोस्ट में किस व्यक्ति या घटनाक्रम के संदर्भ में साझा किया, यह स्पष्ट नहीं किया है। इसलिए इसे किसी विशेष नेता, व्यक्ति या दल के खिलाफ है,इसका सीधा अनुमान लगाना सही नहीं है। लेकिन समय महत्वपूर्ण है। बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। भाजपा को 27, निर्दलीयों को 10 और आरएलपी को एक सीट मिली।

बहुमत मिलने के बावजूद महापौर प्रत्याशी चयन के दौरान कांग्रेस के भीतर असहमति खुलकर सामने आई। कांग्रेस ने अनिल कल्ला को महापौर पद का अधिकृत प्रत्याशी बनाया, जबकि वार्ड 50 से कांग्रेस पार्षद नवरत्न डागा ने उनके खिलाफ निर्दलीय नामांकन दाखिल किया था। इसके बाद 18 सितंबर को डागा ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद अनिल कल्ला के सामने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में चुनावी स्थिति काफी साफ हुई। महापौर चुनाव 21 सितंबर को होना है।

सवाल उठ रहे हैं—क्या यह पोस्ट केवल साहित्यिक व्यंग्य है या कांग्रेस के भीतर........

यहीं से सोशल मीडिया की कविता को लेकर सवाल उठ रहे हैं—क्या यह पोस्ट केवल साहित्यिक व्यंग्य है या कांग्रेस के भीतर हालिया घटनाक्रम पर किसी नेता की अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया? कविता में एक जगह कहा गया है कि “जो गिरने में असमर्थ हैं वे तुम्हारी आलोचना करेंगे” और अंत में ‘गिरते रहो’ का दोहराव है। राजनीतिक माहौल में ऐसे शब्द स्वाभाविक रूप से अलग-अलग अर्थ पैदा करते हैं।

बीकानेर कांग्रेस के सामने अब असली चुनौती केवल महापौर बनाना नहीं, बल्कि चुनाव के दौराकेन सामने आए मतभेदों के बाद संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना भी है। दूसरी ओर भाजपा के पास 27 पार्षद हैं और वह महापौर चुनाव में अपने प्रत्याशी डॉ सुरेंद्र सिंह शेखावत के साथ मैदान में है और निर्दलियों के साथ मिलकर कांग्रेस के सामने कड़ी चुनौती दे रही है।

सवाल यही है—कविता में जिस ‘गिरने’ की बात हो रही है, वह केवल साहित्यिक व्यंग्य है या बीकानेर की मौजूदा राजनीति में किसी को आईना दिखाने का प्रयास? फिलहाल इसका जवाब पोस्ट करने वाले नेता ही बेहतर दे सकते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि महापौर चुनाव से ठीक पहले आई इस कविता ने बीकानेर कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को चर्चाओं को लेकर एक नया विषय दे दिया है।

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