उदयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को उदयपुर में कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप ने जीता था। उन्होंने मुगल इतिहासकारों द्वारा गढ़े गए नैरेटिव को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि युद्ध भारत की ओर से लड़ने वालों की जीत थी।
हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर गांधी ग्राउंड (महाराणा भूपाल स्टेडियम) में आयोजित ‘हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतु:शती समारोह’ में भागवत मुख्य अतिथि थे।

भागवत ने अपने संबोधन में कहा, “हल्दीघाटी का युद्ध अनिर्णीत नहीं था और न ही अकबर ने उसे जीता था। वास्तव में, अपनी मातृभूमि की रक्षा करने वाले महाराणा प्रताप ने सफलता प्राप्त की। यह महाराणा प्रताप और भारत की ओर से लड़ने वालों की स्पष्ट विजय थी।” उन्होंने जोर दिया कि कुछ इतिहासकारों ने युद्ध को अलग ढंग से पेश किया, लेकिन हकीकत यह है कि मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा कि महाराणा प्रताप अकेले नहीं लड़े थे, बल्कि पूरी समाज उनके साथ खड़ी थी। यह युद्ध मात्र भूमि के लिए नहीं, बल्कि संस्कृति, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लड़ा गया था। भागवत ने एकता और सद्भाव पर भी जोर दिया और कहा कि संकट के समय ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी यह बना रहना चाहिए।

कार्यक्रम में महाराणा प्रताप की वीरता, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा की गाथा को याद किया गया। यह आयोजन वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति और स्थानीय संगठनों द्वारा आयोजित किया गया था।
ऐतिहासिक संदर्भ: 18 जून 1576 को हुए हल्दीघाटी युद्ध को लेकर पारंपरिक इतिहास में अक्सर इसे अनिर्णीत या मुगलों के पक्ष में बताया जाता रहा है, लेकिन कई स्थानीय और वैकल्पिक स्रोत महाराणा प्रताप की रणनीति और साहस को उनकी जीत का आधार मानते हैं। भागवत के बयान ने इस बहस को फिर से राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।