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सतत खाद्य प्रणालियों को अपनाने का संदेश लेकर प्रदेशभर में आयोजित हुए जागरूकता कार्यक्रम— ब्रिक्स सतत लाइफ स्टाइल वीक के चौथे दिन ‘एडॉप्ट सस्टेनेबल फूड सिस्टम्स'  थीम पर प्रदेशव्यापी गतिविधियों का आयोजन, मोटे अनाज एवं पारंपरिक खाद्यान्नों के उपयोग, खाद्य अपव्यय रोकने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्

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जयपुर, 4 नवंबर। पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा सतत जीवनशैली को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रदेश में आयोजित किए जा रहे ‘ब्रिक्स सतत लाइफ स्टाइल वीक’ के चौथे दिन बुधवार को ‘एडॉप्ट सस्टेनेबल फूड सिस्टम्स’  थीम के तहत प्रदेशभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को पौष्टिक एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों को अपनाने, मोटे अनाज और पारंपरिक खाद्यान्नों के उपयोग को बढ़ावा देने, भोजन की बर्बादी रोकन

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जयपुर, 4 नवंबर। पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा सतत जीवनशैली को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रदेश में आयोजित किए जा रहे ‘ब्रिक्स सतत लाइफ स्टाइल वीक’ के चौथे दिन बुधवार को ‘एडॉप्ट सस्टेनेबल फूड सिस्टम्स’  थीम के तहत प्रदेशभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का आयोजन किया गया।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को पौष्टिक एवं स्थानीय खाद्य पदार्थों को अपनाने, मोटे अनाज और पारंपरिक खाद्यान्नों के उपयोग को बढ़ावा देने, भोजन की बर्बादी रोकने तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य खाद्य उत्पादन से लेकर उपभोग तक की पूरी प्रक्रिया को अधिक टिकाऊ, जिम्मेदार और पर्यावरण अनुकूल बनाने के प्रति जन-जागरूकता विकसित करना रहा।

प्रदेशव्यापी कार्यक्रमों के आयोजन में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा एवं उच्च शिक्षा विभाग तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सक्रिय भूमिका रही।

मोटे अनाज एवं पारंपरिक खाद्यान्नों के प्रति किया जागरूक

दिवस की थीम के अनुरूप विभिन्न स्थानों पर मोटे अनाज (मिलेट्स) एवं पारंपरिक खाद्यान्नों के महत्व पर कार्यशालाओं, जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें बाजरा, ज्वार, रागी सहित अन्य पारंपरिक अनाजों के पोषण संबंधी महत्व तथा इनके उत्पादन एवं उपभोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया। आमजन को स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों को अपनी दैनिक भोजन प्रणाली में शामिल करने के लिए प्रेरित किया गया।

भोजन की बर्बादी रोकने और खाद्य अपशिष्ट के प्रबंधन का संदेश

कार्यक्रमों के दौरान भोजन की बर्बादी रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए तथा अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं आमजन को खाद्य अपव्यय कम करने की शपथ दिलाई गई। साथ ही भोजन की आवश्यकता के अनुरूप ही परोसने, अतिरिक्त भोजन का उचित उपयोग करने तथा जैविक खाद्य अपशिष्ट से कम्पोस्ट तैयार करने के तरीकों के प्रति जागरूक किया गया।

स्वस्थ एवं टिकाऊ खानपान की आदतों को अपनाने पर जोर

विभिन्न संस्थानों एवं शैक्षणिक परिसरों में स्वस्थ और टिकाऊ खानपान की आदतों को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें संतुलित एवं पौष्टिक आहार, स्थानीय खाद्य उत्पादों, मौसमी फलों एवं सब्जियों के उपयोग तथा खाद्य संसाधनों के जिम्मेदार उपभोग का महत्व बताया गया।

किसानों एवं स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी से टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहन

कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के माध्यम से किसानों, स्वयं सहायता समूहों, संस्थानों तथा स्थानीय बाजारों एवं मंडियों के स्तर पर टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता विकसित करने पर जोर दिया गया। कृषि उत्पादन में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जल एवं मृदा के विवेकपूर्ण उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कल सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने पर रहेगा फोकस

के पांचवें दिन गुरुवार, 5 नवंबर को ‘रिड्यूस सिंगल—यूज प्लास्टिक’ थीम के तहत प्रदेशभर में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

इस दिन सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति आमजन को जागरूक करने के साथ ही प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े एवं जूट के थैले, पुनः उपयोग योग्य बोतलें तथा पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों एवं स्थानीय निकायों की सहभागिता से जागरूकता कार्यक्रम, शपथ गतिविधियां तथा प्लास्टिक के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करने वाली पहल की जाएंगी।

सप्ताह के माध्यम से प्रदेशवासियों को यह संदेश दिया जा रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित न रहकर प्रत्येक नागरिक की दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बने। छोटे-छोटे व्यवहारगत बदलावों और सामूहिक सहभागिता से ही सतत एवं स्वच्छ भविष्य का निर्माण संभव है।

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डॉ. अमृता कटारा/ब्रजेश

संलग्न दस्तावेज़: फाइल 1

स्रोत: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान सरकार (जिला जयपुर) · 04 नवम्बर 2026, 09:24 PM — मूल विज्ञप्ति

स्रोत: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान

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