मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग

बीकानेर में निकाय चुनाव : पालिकाओं में विधायकों की चली, निगम में ‘दिग्गजों’ में है खींचतान!

छह पालिकाओं में बीजेपी ने नाम किए लगभग फाइनल, निगम के कुछ वार्डों में आखिरी वक्त तक पेंच

लेखक Administrator

अपडेट:

जयपुर । निकाय चुनाव में टिकटों को लेकर भाजपा के भीतर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। बीकानेर जिले की छह नगर पालिकाओं में पार्टी ने लगभग सभी नाम तय कर लिए हैं, लेकिन बीकानेर नगर निगम के…

शेयर करें
बीकानेर में निकाय चुनाव : पालिकाओं में  विधायकों की चली, निगम में ‘दिग्गजों’ में है  खींचतान!

जयपुर । निकाय चुनाव में टिकटों को लेकर भाजपा के भीतर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। बीकानेर जिले की छह नगर पालिकाओं में पार्टी ने लगभग सभी नाम तय कर लिए हैं, लेकिन बीकानेर नगर निगम के कुछ वार्ड अभी भी भाजपा के लिए ‘पेचीदा पहेली’ बने हुए हैं। शुक्रवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में हुई मैराथन बैठक में टिकटों पर लंबा मंथन हुआ। बैठक में नामों के साथ-साथ स्थानीय गुटबाजी, सामाजिक समीकरण और चुनावी जीत की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

सूत्रों की मानें तो छह नगर पालिकाओं में टिकटों का पिटारा लगभग बंद हो चुका है, जबकि नगर निगम में कुछ नामों पर अंतिम सहमति बनाने की कवायद देर तक चलती रही। पार्टी शनिवार को उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकती है। सूची सामने आते ही यह भी साफ होगा कि किस नेता के समर्थक को टिकट मिला और किस खेमे को झटका लगा।

पालिकाओं में विधायकों की ‘चली’

नगर पालिका टिकटों के चयन में स्थानीय विधायकों की राय को खासा महत्व दिए जाने की चर्चा है। संबंधित विधानसभा क्षेत्र के विधायकों से दावेदारों को लेकर फीडबैक लिया गया और उनकी पसंद-नापसंद को टिकट चयन में महत्वपूर्ण आधार माना गया।

भाजपा की रणनीति साफ नजर आ रही है—स्थानीय निकाय में ऐसा उम्मीदवार उतारा जाए, जिसे विधायक और संगठन दोनों चुनाव में पूरी ताकत से मैदान में उतार सकें।

देशनोक, खाजूवाला, लूणकरणसर, नापासर, नोखा और श्रीडूंगरगढ़ में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद पार्टी ने स्थानीय समीकरण साधते हुए नामों को अंतिम रूप देने का दावा किया है। अब इन नामों पर सिर्फ अधिकृत मुहर लगना बाकी माना जा रहा है।

निगम में मामला इतना आसान नहीं

बीकानेर नगर निगम की तस्वीर पालिकाओं से अलग है। यहां कई वार्डों में एक से ज्यादा मजबूत दावेदार होने के कारण पार्टी नेतृत्व को संतुलन साधना पड़ रहा है। कहीं स्थानीय संगठन की पसंद अलग है तो कहीं बड़े नेताओं की पसंद अलग बताई जा रही है।

यही वजह है कि निगम के कुछ वार्डों में ‘टिकट किसका?’ का सवाल आखिरी दौर तक बना हुआ है।

भाजपा के सामने चुनौती सिर्फ जिताऊ उम्मीदवार चुनने की नहीं है, बल्कि टिकट वितरण के बाद संभावित नाराजगी और बगावत को रोकने की भी है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि जिस नाम को टिकट नहीं मिलेगा, वह चुनावी समीकरण बिगाड़ने की स्थिति में न पहुंच जाए।

वार्ड 75 बना सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा?

इन सबके बीच वार्ड नंबर 75 सबसे ज्यादा चर्चा में है। पूर्व यूआईटी अध्यक्ष महावीर रांका के इस वार्ड से चुनाव लड़ने की संभावित दावेदारी ने भाजपा के भीतर सियासी गणित को गर्म कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक रांका के नाम को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में एक राय नहीं है। पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी और बीकानेर पश्चिम के विधायक की ओर से रांका के नाम पर आपत्ति जताए जाने की चर्चा है। वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के रांका के पक्ष में होने की बात सामने आ रही है।

पार्टी के चुनाव प्रभारी मुकेश दाधीच सहित कुछ अन्य नेताओं के भी रांका के पक्ष में होने की चर्चा है। ऐसे में वार्ड 75 महज एक वार्ड का टिकट नहीं रह गया है, बल्कि यह भाजपा के भीतर चल रहे राजनीतिक संतुलन की परीक्षा बनता नजर आ रहा है।

शनिवार को खुलेगा टिकट का राज

शुक्रवार की मैराथन बैठक के बाद अब भाजपा कार्यकर्ताओं और दावेदारों की निगाह शनिवार पर टिक गई है। यदि पार्टी सूची जारी करती है तो छह नगर पालिकाओं में पहले से तय नामों पर मुहर लग जाएगी, वहीं नगर निगम के विवादित वार्डों की तस्वीर भी साफ हो जाएगी।

शेयर करें

टिप्पणियां

0 / 1200

टिप्पणियां प्रकाशन के 30 दिन बाद बंद हो जाती हैं।

संबंधित खबरें