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बूंदी में मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता पहल

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बूंदी में ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के अंतर्गत कृषि विभाग ने मिलेट्स संवर्धन हेतु किसानों को जागरूक करने के लिए गोष्ठियाँ आयोजित कीं, जिसमें बाजरा‑ज्वार जैसी फसलें प्रमुख हैं।

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कृषि विभाग बूंदी द्वारा किसानों को मिलेट्स की खेती के प्रति किया जा रहा जागरूक
— सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान

बूंदी, 4 नवंबर को ब्रिक्स सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के हिस्से के रूप में कृषि विभाग ने मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता पहल शुरू की। विभाग ने किसानों को बाजरा, ज्वार आदि मोटे अनाज की महत्ता बताई।

सप्ताह के अंत में बुधवार को आयोजित “सतत खाद्य प्रणालियां अपनाएं” कार्यक्रम में कृषि विभाग ने मिलेट्स संवर्धन को प्राथमिकता दी। विभाग के अनुसार, यह पहल पारंपरिक फसलों को संरक्षण, कृषि जैव विविधता को बढ़ावा और जलवायु‑अनुकूल खेती के विकल्प प्रदान करने के उद्देश्य से है।

मिलेट्स की खेती के लाभ

बाजरा और ज्वार राजस्थान की जलवायु के अनुकूल हैं, कम पानी की आवश्यकता और कम उर्वरता वाली भूमि में भी उगाई जा सकती हैं। इन फसलों में कीट‑बीमारी का प्रकोप कम रहता है, जिससे सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है।

पोषण के दृष्टिकोण से भी मिलेट्स महत्वपूर्ण हैं; इनके उत्पादन से स्थानीय खाद्य प्रणालियों की मजबूती और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन मिलता है। साथ ही, इन फसलों से प्राप्त चारा पशुपालन में उपयोगी है, जिससे खेती‑पशुपालन वाले किसानों को अतिरिक्त आय स्रोत मिलता है।

किसानों के लिए कार्रवाई

सस्टेनेबल लाइफस्टाइल वीक के तहत जिले के कृषि पर्यवेक्षक मुख्यालयों एवं ब्लॉक मुख्यालयों में मिलेट्स की कृषक गोष्ठियाँ आयोजित की गईं। विभाग की अपील है कि किसान अपनी भूमि, जलवायु और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों के अनुसार बाजरा, ज्वार आदि की खेती को बढ़ावा दें।

  • किसान अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक या कृषि अधिकारियों से उपयुक्त किस्म, बुवाई समय और फसल प्रबंधन की जानकारी ले सकते हैं।
  • स्थानीय जलवायु के अनुकूल फसलें चुनने से जल संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरणीय दबाव में कमी आती है।

स्रोत: Times of Rajasthan

स्रोत: Times of Rajasthan

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