Skip to content
हिन्दी
BREAKING

फ्रांस में जो हुआ वो भारत में नहीं हो, इसके लिए मोदी-शाह ने पहले से क्या तैयारी की है?

Updated:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड डोनाल्ड ने फ्रांस में हिंसा और कहानियों की सच्चाई के बारे में सोशल मीडिया पर जो टिप्पणी की है, उसने पूरी दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है। उदाहरण ने…

फ्रांस में जो हुआ वो भारत में नहीं हो, इसके लिए मोदी-शाह ने पहले से क्या तैयारी की है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड डोनाल्ड ने फ्रांस में हिंसा और कहानियों की सच्चाई के बारे में सोशल मीडिया पर जो टिप्पणी की है, उसने पूरी दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है। उदाहरण ने लिखा, "फ्रांस जल रहा है!" और चेतावनी दी है कि अलग-अलग दुनिया से आए लोगों के आव्रजन ने कभी महान रहे देशों को संकट में डाल दिया है। उन्होंने फ्रांस से अपनी सहमति बंद करने और बहुत देर से पहले होने वाले परिवर्तनों पर नियंत्रण पाने की अपील की है। वास्तविक की यह टिप्पणी भले ही राजनीतिक रूप से कठोर हो, लेकिन इसके पीछे जो उद्बोधन प्रश्न है वह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आखिर किसी राष्ट्र की सीमा, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है? और जब इन होटलों में से कोई भी होटल में फेल हो जाता है, तो उसकी कीमत कितनी चुकाई जाती है?

फ्रांस के हालात से पूरी दुनिया की स्थिति

17 अक्टूबर को फ्रांस में प्रदर्शन के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे किसी भी देश के लिए बनी हुई हैं। सामुदायिक, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े समूहों को लेकर हजारों लोगों के बीच में हिंसक समुदाय ने समुदाय में आग लगा दी और सरकारी संरचनाओं को बढ़ावा दिया। लिमोज़ शहर के ऐतिहासिक टाउन हॉल को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। पेरिस, मार्सेई और लियोन में भी हिंसा और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। फ्रांसीसी अधिकारियों ने कट्टरपंथियों की हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल ग्रेजुएटन ने राष्ट्र के नाम पर इस हिंसा पर गहरा मौन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शहरों की सड़कों पर इस तरह का विनाश होना असंभव है। ब्लास्टर्स ने सुरक्षा बलों के समर्थन में स्थितियाँ पैदा कीं, स्पष्ट किया कि जायज़ खण्डों और हिंसा के बीच अंतर किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन को सार्वजनिक इमारतों और लाइसेंसों के खिलाफ सुरक्षा सुनिश्चित करने, कुछ प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने और हिंसा करने वालों पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उनका संदेश साफ था कि संवाद का अर्थ निर्बलता और लोकतांत्रिक अधिकार का अर्थ दंड से मुक्ति नहीं है।

देखा जाए तो एक आकर्षक बात समझ की जरूरत है। लोकतंत्र में विरोध करना अधिकार है, लेकिन हिंसा करके सरकार को नुकसान पहुंचाना, सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना और आम नागरिकों के जीवन को संकट में डालना अधिकार नहीं हो सकता। यदि कोई समूह अपने राजनीतिक या वादी विचारधारा के लिए कानून को चुनौती देता है, तो सरकार का दायित्व है कि वह ठोस कार्रवाई करे। सरकार की प्राथमिकता और उसकी कंपनियों पर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन देश की कानून-व्यवस्था को बंधक नहीं बनाया जा सकता। वीरगाइड देखें

Share

Comments

0 / 1200

Comments close 30 days after publication.

Related News