Skip to content
BREAKING

डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) 5.0 अभियान ने पहले पाँच दिनों में 40 लाख प्रमाणपत्र बनाए

Updated:

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि डीएलसी 5.0 के पहले पाँच दिनों में लगभग 40 लाख प्रमाणपत्र बनाकर चेहरा प्रमाणीकरण की अपनाने की दर 80% तक पहुँची।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र 5.0 अभियान का शुभारम्भ किया
— Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions / Wikimedia Commons (GODL-India)

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) 5.0 अभियान का शुभारम्भ किया, जिसमें पहले पाँच दिनों में लगभग 40 लाख प्रमाणपत्र तैयार हुए। इस अवधि में चेहरा प्रमाणीकरण अपनाने की दर 61% से बढ़कर लगभग 80% हो गई।

डॉ. सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष इसी अवधि में 25 लाख प्रमाणपत्र बनाये गये थे, जिससे इस साल 60% की वृद्धि दर्ज हुई। कुल 1.92 करोड़ प्रमाणपत्रों में से 1.17 करोड़ चेहरा प्रमाणीकरण के माध्यम से उत्पन्न हुए, जो पेंशनभोगियों के बीच डिजिटल तकनीक के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

अभियान का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

डॉ. सिंह ने कहा कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य वृद्ध नागरिकों को जीवनयापन में आसानी प्रदान करना है। चेहरा पहचान तकनीक के माध्यम से पेंशनभोगी मोबाइल फोन से बिना बैंक या कार्यालय जाए डिजिटल प्रमाणपत्र बना सकते हैं। अभियान में पेंशन विभाग, डाक विभाग, रेलवे, रक्षा, दूरसंचार, ई‑आईटी मंत्रालय और यूआईडीएआई सहित कई सरकारी एजेंसियों ने सहयोग किया।

पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा ने बताया कि लगभग 3,000 स्थानों को शिविरों के माध्यम से कवर किया गया है और घर‑तक‑सेवा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे गतिशीलता या भौगोलिक बाधाओं वाले बुजुर्गों तक पहुँच सुनिश्चित हुई।

डिजिटल सशक्तिकरण के अतिरिक्त कदम

डॉ. सिंह ने पेंशन‑संबंधी सुधारों का उल्लेख किया, जिसमें पेंशन अदालतें, सीपीईएनजीआरएएमएस के माध्यम से शिकायत निवारण तंत्र और नियमों का सरलीकरण शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार पेंशनभोगियों के सुझावों के लिए खुली है और अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाओं को हटाने पर काम जारी रखेगी।

  • पहले पाँच दिनों में तैयार हुए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र: लगभग 40 लाख
  • चेहरा प्रमाणीकरण अपनाने की दर: लगभग 80%
  • पिछले वर्ष की इसी अवधि में प्रमाणपत्र: 25 लाख (60% वृद्धि)
  • शिविरों द्वारा कवर किए गए स्थान: लगभग 3,000

स्रोत: Times of Rajasthan

Source: Times of Rajasthan

Share

Comments

0 / 1200

Comments close 30 days after publication.

Related News