डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) 5.0 अभियान का शुभारम्भ किया, जिसमें पहले पाँच दिनों में लगभग 40 लाख प्रमाणपत्र तैयार हुए। इस अवधि में चेहरा प्रमाणीकरण अपनाने की दर 61% से बढ़कर लगभग 80% हो गई।
डॉ. सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष इसी अवधि में 25 लाख प्रमाणपत्र बनाये गये थे, जिससे इस साल 60% की वृद्धि दर्ज हुई। कुल 1.92 करोड़ प्रमाणपत्रों में से 1.17 करोड़ चेहरा प्रमाणीकरण के माध्यम से उत्पन्न हुए, जो पेंशनभोगियों के बीच डिजिटल तकनीक के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
अभियान का उद्देश्य और कार्यप्रणाली
डॉ. सिंह ने कहा कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य वृद्ध नागरिकों को जीवनयापन में आसानी प्रदान करना है। चेहरा पहचान तकनीक के माध्यम से पेंशनभोगी मोबाइल फोन से बिना बैंक या कार्यालय जाए डिजिटल प्रमाणपत्र बना सकते हैं। अभियान में पेंशन विभाग, डाक विभाग, रेलवे, रक्षा, दूरसंचार, ई‑आईटी मंत्रालय और यूआईडीएआई सहित कई सरकारी एजेंसियों ने सहयोग किया।
