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नेपाल में तबाही का सैलाब: 157 की मौत, 750 से ज्यादा लापता; 133 भारतीयों की भी तलाश

लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। इनमें 133 भारतीय, 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक शामिल

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

काठमांडू। नेपाल-चीन सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। नेपाल में अब तक कम से कम 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई…

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नेपाल में तबाही का सैलाब: 157 की मौत, 750 से ज्यादा लापता; 133 भारतीयों की भी तलाश

मुख्य बातें

  1. हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते ग्लेशियर और जलवायु संबंधी जोखिमों से क्षेत्र में बढ़ता प्राकृतिक खतरा
  2. भारत सरकार ने नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय शुरू किया
  3. नेपाल की सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में जुटी

काठमांडू। नेपाल-चीन सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। नेपाल में अब तक कम से कम 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 750 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। कई भारतीय तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस क्षेत्र में थे।

चीन के तिब्बत क्षेत्र से आया पानी का सैलाब

यह आपदा नेपाल के रासुवा और आसपास के इलाकों में उस समय आई जब चीन के तिब्बत से लगे हिमालयी क्षेत्र में अचानक भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। शुरुआती वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार हिमनद के हिस्से के टूटने और बर्फ-चट्टान के बड़े पैमाने पर खिसकने से नदी में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव पैदा हुआ।

हालांकि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में इसे सीधे तौर पर ‘चीन कनेक्शन’ से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन उपलब्ध शुरुआती वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर इसे प्राकृतिक हिमनदीय घटना माना जा रहा है। घटना के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच अभी जारी है।

133 भारतीय लापता

नेपाल के अधिकारियों के अनुसार लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। इनमें 133 भारतीय, 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक शामिल बताए गए हैं। कई लोग तीर्थयात्रा और पर्यटन के सिलसिले में नेपाल-तिब्बत सीमा के नजदीकी क्षेत्रों में मौजूद थे। भारत सरकार ने नेपाल में राहत और बचाव अभियान के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय शुरू किया है।

सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं तबाह

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रासुवा सहित नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के क्षेत्रों में हुआ। तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में पत्थर, मिट्टी और मलबा लेकर आया, जिससे कई मकान, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए। कई इलाकों का संपर्क टूट गया है।

भूस्खलन और बाढ़ से क्षेत्र की हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। महत्वपूर्ण मार्गों के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

कुछ ही मिनटों में बदल गया नदी का स्वरूप

प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध तस्वीरों में कई इलाकों में बाढ़ के बाद चारों तरफ कीचड़, पत्थर और मलबा दिखाई दे रहा है। कई जगह पानी का स्तर अचानक कई मीटर तक बढ़ गया। तेज बहाव में वाहन और अन्य सामान बह गए तथा निचले इलाकों में बने भवनों की निचली मंजिलें मलबे में दब गईं।

चीन के तिब्बत में भी नुकसान

आपदा का असर सीमा पार चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी हुआ है। चीन की ओर से तीन लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है। इस तरह नेपाल और चीन दोनों को मिलाकर मृतकों की संख्या 160 के आसपास पहुंच गई है।

राहत और बचाव अभियान जारी

नेपाल की सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। खराब मौसम, मलबे और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। कई स्थानों पर हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों की तलाश और मृतकों की पहचान का काम जारी है, इसलिए मृतकों और लापता लोगों की संख्या में आगे बदलाव संभव है।

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता प्राकृतिक खतरा

विशेषज्ञों ने इस घटना को हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते ग्लेशियर और जलवायु संबंधी जोखिमों से भी जोड़कर देखा है। वैज्ञानिक यह जांच कर रहे हैं कि ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के टूटने की घटना किस तरह शुरू हुई और क्या इसके पीछे भूकंपीय गतिविधि या अन्य प्राकृतिक कारण भी जिम्मेदार थे।

नेपाल की यह त्रासदी एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं के खतरे को सामने लेकर आई है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों को तलाशना और लापता भारतीयों समेत सभी प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित निकालना है।

स्रोत: NSI MEDIA

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