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बीकानेर जिला परिषद में पांचवीं बार महिला बनेगी जिला प्रमुख, तीन वार्डों पर टिकी निगाहें

लेखक Administrator

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बीकानेर। बीकानेर जिला परिषद के इतिहास में एक बार फिर महिला नेतृत्व की नई कड़ी जुड़ने जा रही है। जिला प्रमुख का पद इस बार अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने के कारण किसी भी वर्ग…

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बीकानेर जिला परिषद में पांचवीं बार महिला बनेगी जिला प्रमुख, तीन वार्डों पर टिकी निगाहें
Nikita choudhary, Congress candidate

मुख्य बातें

  1. कांता खतूरिया, सुनीता तर्ड और सुशीला सींवर संभाल चुकी हैं जिम्मेदारी
  2. वार्ड 13, 18 और 26 के चुनावी नतीजों से तय होंगे सियासी समीकरण

बीकानेर। बीकानेर जिला परिषद के इतिहास में एक बार फिर महिला नेतृत्व की नई कड़ी जुड़ने जा रही है। जिला प्रमुख का पद इस बार अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने के कारण किसी भी वर्ग की महिला को जिले के ग्रामीण विकास की कमान संभालने का अवसर मिलेगा। करीब 66 साल के इतिहास में अब तक तीन महिला जनप्रतिनिधि चार कार्यकालों में जिला प्रमुख रह चुकी हैं। नए चुनाव के बाद पांचवीं बार यह जिम्मेदारी किसी महिला को मिलने जा रही है।

जिला प्रमुख पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। जिला परिषद के 41 वार्डों में कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है, लेकिन वार्ड 13, 18 और 26 पर विशेष नजर है। इन वार्डों में कांग्रेस, भाजपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है। इन सीटों पर राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा के साथ जिला प्रमुख पद की संभावित दावेदारी भी चर्चा में है।

तीन महिला नेताओं के नाम दर्ज है इतिहास

बीकानेर जिला परिषद में महिला नेतृत्व की बात करें तो कांता खतूरिया का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने पहली बार 1980 से 1985 तक जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 1985 से 1987 तक भी वह इस पद पर रहीं। इस तरह कांता खतूरिया दो बार जिला प्रमुख बनने वाली महिला जनप्रतिनिधि रहीं।

इसके बाद सुनीता तर्ड ने वर्ष 2000 से 2005 तक जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया। वहीं, सुशीला सींवर वर्ष 2015 से 2020 तक इस पद पर रहीं। इन तीनों महिला नेताओं के चार कार्यकाल के बाद अब पांचवीं बार महिला जिला प्रमुख बनने का रास्ता साफ हुआ है।

वार्ड 13: डूडी परिवार की राजनीतिक विरासत की परीक्षा

जिला परिषद का वार्ड 13 इस बार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस ने स्वर्गीय रामेश्वर डूडी के परिवार की बहू निकिता चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा की ओर से कमला देवी, आरएलपी की ओर से संजू और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मोहनी देवी चुनाव मैदान में हैं।

चार प्रत्याशियों के बीच होने वाले इस मुकाबले में पार्टी के परंपरागत वोटों के साथ उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय जनाधार भी महत्वपूर्ण होंगे। निकिता चौधरी की उम्मीदवारी के चलते इस सीट को डूडी परिवार की राजनीतिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है।

वार्ड 18: इंदू तर्ड के अनुभव पर भाजपा को भरोसा

वार्ड 18 में भाजपा ने पूर्व उप जिला प्रमुख इंदू तर्ड को टिकट दिया है। स्वर्गीय रामेश्वर डूडी की भांजी इंदू तर्ड को स्थानीय राजनीति और जनप्रतिनिधि के रूप में काम करने का अनुभव है। कांग्रेस ने माया देवी और RLP ने द्रोपदी देवी को मैदान में उतारा है।

तीनों दलों के प्रत्याशियों के बीच मुकाबले में इंदू तर्ड का राजनीतिक अनुभव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, चुनावी परिणाम स्थानीय मतदाताओं के रुझान, प्रत्याशियों की सक्रियता और पार्टियों के जनाधार पर निर्भर करेगा। इस वार्ड का नतीजा जिला परिषद के भीतर राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

वार्ड 26: सरिता चौहान के सामने भाजपा और RLP की चुनौती

पूगल क्षेत्र के वार्ड 26 में पूर्व कैबिनेट मंत्री गोविंदराम मेघवाल की बेटी सरिता चौहान कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा ने निर्मला देवी और आरएलपी ने माया देवी को प्रत्याशी बनाया है।

सरिता चौहान की उम्मीदवारी से यह सीट मेघवाल परिवार की राजनीतिक प्रतिष्ठा से जुड़ गई है। वहीं, भाजपा और आरएलपी के प्रत्याशी भी अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए मैदान में हैं। यहां परिवार की राजनीतिक पहचान के साथ स्थानीय मुद्दे, मतदाताओं से संपर्क और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत स्वीकार्यता परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

कांग्रेस-भाजपा के साथ आरएलपी भी मुकाबले में

इन तीनों वार्डों के चुनावी परिणाम को जिला परिषद में कांग्रेस और भाजपा की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने अपने प्रभाव को बनाए रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा इन सीटों पर बेहतर प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहेगी। आरएलपी की मौजूदगी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा और जिले के अन्य प्रमुख नेताओं की राजनीतिक सक्रियता के बीच जिला परिषद चुनाव के नतीजों पर सबकी नजर है। इन सीटों के परिणाम केवल राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि जिला परिषद में बनने वाले व्यापक सियासी समीकरणों के लिहाज से भी अहम होंगे।

अब देखना होगा कि चुनावी नतीजों के बाद किस महिला जनप्रतिनिधि के सिर जिला प्रमुख का ताज सजेगा और बीकानेर जिला परिषद को पांचवीं बार महिला नेतृत्व कौन प्रदान करेगा।

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