बूंदी, 28 अक्टूबर – राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के बाल श्रम और बंधुआ श्रम मामलों के विशेष मॉनिटर धनंजय टिंगल ने कहा कि बाल श्रम की पीड़ा से निकलकर किसी बच्चे को पढ़ाई कर शिक्षक या डॉक्टर बनते हुए देखना सबसे बड़े गर्व की बात है।
टिंगल ने बुधवार को होटल अनंता में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में यह संदेश दिया कि बाल एवं बंधुआ मजदूरों का पुनर्वास तभी संभव है जब बचाव के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन हो।
कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य
पीड़ित बच्चों के परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, ताकि बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
