राजस्थान के लिए पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल दुनिया में एक उभरते केंद्र के रूप में खुद को पेश करना एक बात है। कागज पर इसकी प्रगति दिखती है: ई-गवर्नेंस का ढांचा बहुत मजबूत है, जयपुर और जोधपुर में बड़ी डेटा सेंटर की क्षमता, आई-स्टार्ट तंत्र और महिंद्रा वर्ल्ड सिटी सेज़। लेकिन जब हम इसके आंकड़ों के साथ आगे बढ़ते हैं, तो एक बड़ा अंतर्विरोध दिखाई देता है।
राज्य के बड़े हिस्से के साथ अच्छे संस्थान भी हैं, लेकिन देश के आईटी निर्यात में इसकी हिस्सेदारी बस 1 प्रतिशत से भी कम है। जबकि देश के आईटी निर्यात का आंकड़ा 11 लाख करोड़ रुपए से ऊपर है, राजस्थान के निर्यात के आंकड़े केवल 3,200 से 3,500 करोड़ रुपए हैं।
अंतर्विरोध विज़न की कमी नहीं, बल्कि ढांचागत असंतुलन है। राजस्थान को बैक-ऑफ़िस केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार केंद्र बनाना है। इसके लिए हमें खामियों को जानना होगा और डेटा हमें रास्ता दिखाएगा।
