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नागपुर में वाटरशेड प्रबंधन के राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों पर परामर्श

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भूमि संसाधन विभाग और अन्य संस्थानों ने नागपुर में 4 और 5 नवंबर 2026 को विज्ञान आधारित वाटरशेड प्रबंधन पर राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की।

एनआरए, आईसीएआर-एनबीएसएस और एलयूपी और डीओएलआर ने विज्ञान आधारित वाटरशेड प्रबंधन को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के परामर्श का आयोजन किया
— पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार

भूमि संसाधन विभाग ने नागपुर स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो के सहयोग से 4 और 5 नवंबर 2026 को बेहतर वाटरशेड प्रबंधन के राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों के मसौदे पर दो दिवसीय तीसरी राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की। इस बैठक का उद्देश्य वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी-संचालित और सहभागी दृष्टिकोण के माध्यम से वाटरशेड विकास को मजबूत करना है।

उद्घाटन सत्र में भूमि संसाधन विभाग के सचिव आईएएस दिलीप कुमार, एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार, भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव नितिन खाड़े और विश्व बैंक की टास्क टीम लीडर प्रीति कुमार सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

वैज्ञानिक जटिलता और व्यावहारिक कार्यान्वयन में संतुलन

भूमि संसाधन विभाग के सचिव दिलीप कुमार ने वाटरशेड विकास कार्यक्रमों में वैज्ञानिक जटिलता और व्यावहारिक कार्यान्वयन के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी दिशानिर्देश इतने जटिल नहीं होने चाहिए कि वे क्षेत्र-स्तर के कार्यान्वयन के लिए कठिनाइयां पैदा करें।

उन्होंने राज्यों की संस्थागत और तकनीकी क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए लचीलेपन की अनुमति देने और आवंटित धन के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।

डिजिटल और तकनीकी उपकरणों का उपयोग

संयुक्त सचिव नितिन खाड़े ने समयबद्ध तरीके से राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भूमि संसाधन सूची (एलआरआई), डिजिटल मृदा पुस्तकालय और निर्णय समर्थन प्रणाली वाटरशेड योजना को बदल सकते हैं।

उन्होंने स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीक के उचित उपयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया।

स्रोत: Times of Rajasthan

Source: Times of Rajasthan

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