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पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. दास गुप्ता का निधन, बीकानेर में शोक की लहर

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बीकानेर | 27 अक्टूबर 2026। श्रीकोलायत के पूर्व विधायक और बीकानेर के वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. दास गुप्ता का मंगलवार सुबह निधन हो गया। सीने में अचानक दर्द उठने के बाद उन्हें बीकानेर…

पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. दास गुप्ता का निधन, बीकानेर में शोक की लहर
Late Shri R k Das Gupta

बीकानेर | 27 अक्टूबर 2026। श्रीकोलायत के पूर्व विधायक और बीकानेर के वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. दास गुप्ता का मंगलवार सुबह निधन हो गया। सीने में अचानक दर्द उठने के बाद उन्हें बीकानेर के हल्दीराम अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उनके निधन की खबर से बीकानेर के राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। दास गुप्ता ने पांच दशक से अधिक समय तक वकालत करते हुए जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया। वे बीकानेर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर आठ बार निर्वाचित हुए थे।

आपातकाल में जेल गए, 1977 में बने विधायक

आर.के. दास गुप्ता का सार्वजनिक जीवन संघर्ष, सिद्धांतों और जनहित के मुद्दों से जुड़ा रहा। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। वर्ष 1975 से 1977 के बीच वे बीकानेर और जयपुर की जेलों में बंद रहे। आपातकाल समाप्त होने के बाद वर्ष 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में वे जनता पार्टी के टिकट पर श्रीकोलायत विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए।

हालांकि, उनका विधायी कार्यकाल लंबा नहीं रहा। सरकार की नीतियों और अपने सिद्धांतों को लेकर मतभेद के चलते उन्होंने करीब डेढ़ साल बाद विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। उनका यह निर्णय उस दौर की राजनीति में सिद्धांतों को प्राथमिकता देने वाले कदम के रूप में याद किया जाता है।

राजनीति से दूरी, लेकिन जनहित के मुद्दों पर रहे सक्रिय

विधायक पद छोड़ने के बाद आर.के. दास गुप्ता ने वकालत को अपनी प्रमुख कर्मभूमि बनाया। सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के बावजूद वे बीकानेर की समस्याओं और आमजन के हितों से जुड़े मामलों में लगातार सक्रिय रहे। उन्होंने अदालतों के माध्यम से नागरिक समस्याओं को उठाया और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए समाधान की कोशिश की।

बीकानेर शहर में कोटगेट और सांखला फाटक रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम की समस्या उनके प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। शहर को रेलवे क्रॉसिंग की समस्या से राहत दिलाने के लिए उन्होंने रेल बाइपास की मांग को लेकर लंबा संघर्ष किया और रेल रोको आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ा मामला उन्होंने कानूनी स्तर पर भी उठाया। इसके अलावा बीकानेर में राजस्थान हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर भी वे लगातार आवाज उठाते रहे।

पांच दशक से अधिक समय तक की वकालत

आर.के. दास गुप्ता ने वर्ष 1964 में बीकानेर के डूंगर कॉलेज से बीए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 1966 में राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कानून के क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया और लंबे समय तक अधिवक्ता के रूप में सेवाएं दीं।

अपने अनुभव, कानूनी समझ और जनहित के मामलों में सक्रियता के कारण उन्होंने बीकानेर के अधिवक्ता समुदाय में विशिष्ट पहचान बनाई। बीकानेर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर आठ बार निर्वाचित होना उनके प्रति अधिवक्ताओं के विश्वास और उनके लंबे संगठनात्मक योगदान को दर्शाता है।

राजनीतिक और न्यायिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति

आर.के. दास गुप्ता के निधन को बीकानेर के राजनीतिक और न्यायिक जगत के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनका सार्वजनिक जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि सक्रिय राजनीति से हटने के बाद भी जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखा जा सकता है। विधायक के रूप में उनका कार्यकाल भले ही सीमित रहा, लेकिन वकालत और नागरिक समस्याओं को लेकर उनकी सक्रियता लंबे समय तक बनी रही।

उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और अधिवक्ताओं ने शोक व्यक्त किया। बीकानेर बार एसोसिएशन ने भी उनके निधन पर दुख जताया और अधिवक्ताओं ने शोकस्वरूप कार्य स्थगित किया। उनके जाने से बीकानेर ने एक ऐसे वरिष्ठ अधिवक्ता और सार्वजनिक जीवन के व्यक्तित्व को खो दिया, जिन्होंने अपने लंबे करियर में कानून और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी।

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