जयपुर ,
26
अक्टूबर। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सोमवार को नई दिल्ली
Updated:
जयपुर , 26 अक्टूबर। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित संसद में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाग लिया। श्री देवनानी ने कहा कि वैश्विक समस्याओं के समाधान , विभिन्न देशों में संसदीय समन्वय , संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता , लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती , संसद एवं विधानसभाओं में सार्थक बहस और पक्ष-विपक्ष की जिम्मेदारी सहित विभिन्न विषयों पर ब्रिक्स सम्मेलन महत्वपूर्ण है। श्री देवनानी ने कहा कि ब्रिक्स देशों की स
जयपुर ,
26
अक्टूबर। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सोमवार को नई दिल्ली
स्थित संसद में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाग लिया। श्री
देवनानी ने कहा कि वैश्विक समस्याओं के समाधान , विभिन्न देशों
में संसदीय समन्वय , संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता , लोकतांत्रिक
संस्थाओं की मजबूती , संसद एवं विधानसभाओं में सार्थक बहस और पक्ष-विपक्ष की जिम्मेदारी
सहित विभिन्न विषयों पर ब्रिक्स सम्मेलन महत्वपूर्ण है।
श्री देवनानी ने
कहा कि ब्रिक्स देशों की संसदीय बैठक का विशेष महत्व है , क्योंकि इन
देशों में विश्व की आधी आबादी निवास करती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्व
जलवायु परिवर्तन , पर्यावरण , आतंकवाद और सह-अस्तित्व जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। इन विषयों
पर विभिन्न देशों की संसदों के बीच समन्वय और सहयोग आवश्यक है , ताकि सभी देश
मिलकर समस्याओं का समाधान निकाल सकें।
मानव जीवन के
लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता-
श्री देवनानी ने
कहा कि वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में , जब विभिन्न देशों के बीच तनाव और क्षेत्रवाद
जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं , तब मानव जीवन के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए
सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह
लोकतंत्र की जननी एवं आत्मा है। ऐसे में भारत की जिम्मेदारी बनती है कि वह वैश्विक
समस्याओं के समाधान के लिए सभी देशों के साथ मिलकर प्रयास करे।
संयुक्त राष्ट्र
सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण-
श्री देवनानी ने
कहा कि वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया
प्रभावशाली हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए विश्व
के विभिन्न संगठनों , विशेषकर संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में भारत का अधिकार बनता
है। उन्होंने कहा कि कई देश भारत की इस दावेदारी का समर्थन कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ी
है। जब तक संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संगठन भारत जैसे देशों को समुचित रूप से
सम्मिलित नहीं करेंगे , तब तक उनकी प्रासंगिकता , कार्यप्रणाली और निर्णयों के क्रियान्वयन की
प्रभावशीलता में अपेक्षित सुधार नहीं आ सकेगा।
श्री देवनानी ने
विश्वास व्यक्त किया कि ब्रिक्स पार्लियामेंट फोरम में शामिल विभिन्न देशों में से
कई देश भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति और विदेश नीति के सफल प्रयासों के कारण
आज विश्व के अधिकांश बड़े और छोटे देश भारत के समर्थन में खड़े हैं।
लोकतांत्रिक
संस्थाओं में सार्थक बहस और जनसमस्याओं पर चर्चा आवश्यक-
स्पीकर श्री
देवनानी ने नगरपालिका , पंचायतों , विधानसभाओं और लोकसभा तक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार तथा नवाचार
की संभावनाएं बताई। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां
प्रत्येक पांच वर्ष में नगरपालिका , पंचायतों , विधानसभाओं और
लोकसभा के चुनाव होते हैं। पिछले वर्षों में मतदान का प्रतिशत भी बढ़ा है।
पंचायतों में 80 प्रतिशत से अधिक लोगों की सहभागिता देखने को मिल रही है।
उन्होंने कहा कि
जनभागीदारी बढ़ने के साथ ही लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। स्थानीय समस्याओं के
समाधान से लेकर राज्य और केंद्र तक आमजन की आवाज पहुंच रही है तथा लोकतांत्रिक
प्रक्रिया में उनकी सहभागिता बढ़ रही है।
श्री देवनानी ने
कहा कि संसदीय मंचों की स्थापना सार्थक बहस और जनसमस्याओं पर चर्चा के लिए है ,
लेकिन
वर्तमान में इन मंचों पर सार्थक बहस नहीं हो पा रही है और अधिक समय अवरोधों में
व्यतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि पक्ष और विपक्ष , दोनों का
दायित्व है कि वे मिलकर जनता की समस्याओं को सदन में उठाएं और उनके समाधान की दिशा
में कार्य करें।
संसद एवं
विधानसभाओं में सार्थक बहस की परंपरा को मजबूत करना आवश्यक-
श्री देवनानी ने
विधायकों और सांसदों की जिम्मेदारी तथा सदन की कार्यवाही को अधिक प्रभावी बनाने के
संबंध में कहा कि समय-समय पर मर्यादाएं और परंपराएं निर्धारित होती रही हैं।
आवश्यकता उनके पालन की है।
उन्होंने अपने
पूर्व के संसदीय अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री
श्री अटल बिहारी वाजपेयी , श्री आडवाणी जी , श्री मधु लिमये ,
श्री
दंडवते और श्री प्रकाश शास्त्री जैसे नेताओं के समय लोकसभा में बहस का एक स्तर
होता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विपक्ष अपनी अपेक्षित भूमिका का समुचित
निर्वहन नहीं कर पा रहा है।
श्री देवनानी ने
कहा कि लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला इस दिशा में सक्रिय हैं और कई मामलों में
सर्वदलीय बैठकें भी करते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान में भी उन्होंने इस
प्रकार की पहल की है। सभी विधानसभाओं और लोकसभा में अधिक से अधिक बैठकें आयोजित
होनी चाहिए तथा महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर अधिक चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि
सदन ऐसा मंच बनना चाहिए , जहां केवल समय व्यतीत न हो , बल्कि असहमति के
बावजूद सार्थक संवाद हो और जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं।
संवैधानिक
संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी-
स्पीकर श्री
देवनानी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और पक्ष-विपक्ष के बीच
आरोप-प्रत्यारोप के संबंध में कहा कि दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे समन्वय
के साथ कार्य करें। संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आस्था रखते हुए सभी को अपनी
भूमिका निभानी चाहिए।
संवैधानिक
संस्थाओं के प्रति अश्रद्धा निर्माण से बचना आवश्यक—
श्री देवनानी ने
कहा कि कहीं न कहीं संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अश्रद्धा का निर्माण करने की एक
होड़ लगी हुई है। इससे बचना आवश्यक है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए
पक्ष और विपक्ष , दोनों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा तथा संवैधानिक संस्थाओं
के प्रति सम्मान और विश्वास बनाए रखना होगा।
संसदीय लोकतंत्र
की प्रभावशीलता सार्थक बहस और जन समस्याओं के समाधान में-
श्री देवनानी ने
कहा कि संसदीय लोकतंत्र की प्रभावशीलता सार्थक बहस , जनसमस्याओं के
समाधान , परस्पर
समन्वय और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आस्था से सुनिश्चित होती है। इसलिए सभी
जनप्रतिनिधियों को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए जनहित को सर्वोच्च
प्राथमिकता देनी चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष
श्री ओम बिरला की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य एवं
साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधी गण , केंद्रीय मंत्री परिषद के सदस्य गण , राज्य विधान
मंडलों के पीठासीन अधिकारी गण और सांसद गण शामिल थे।
———
डॉ.
लोकेश/रवीन्द्र
संलग्न दस्तावेज़: फाइल 1
स्रोत: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान सरकार (जिला जयपुर) · 26 अक्टूबर 2026, 09:41 PM — मूल विज्ञप्ति
Source: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान
Comments close 30 days after publication.