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नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण समीक्षा समिति की 15वीं बैठक

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में अंतरराज्यीय जल सहयोग के नए आयाम स्थापित ,

नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण समीक्षा समिति की 15वीं बैठक-
— सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में अंतरराज्यीय जल सहयोग के नए आयाम स्थापित ,
  • सहमति , समन्वय , सहयोग और विश्वास से दशकों से लम्बित जल समझौतों ने लिया मूर्त रूप
  • केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल
  • पेयजल और सिंचाई के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार का लक्ष्य ,
  • नर्मदा जल के बेहतर उपयोग से जलाभावग्रस्त क्षेत्रों को मिलेगी राहत ,
  • अधिशेष नर्मदा जल भंडारण के लिए तैयार हो रही परियोजना रिपोर्ट
  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर , 27 अक्टूबर। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में मंगलवार को नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण समीक्षा समिति की 15वीं बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा , महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस , मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव , गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारीगण वीसी के माध्यम से जुड़े।

केन्द्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व एवं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में वर्षों से लम्बित अंतरराज्यीय जल सहयोग के नए आयाम स्थापित हुए हैं। नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति द्वारा 7 जुलाई , 2026 को नई दिल्ली में राजस्थान , गुजरात , मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में हुए समझौते को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आपसी सहमति , समन्वय , सहयोग और विश्वास से दशकों पुराने जल समझौतों ने मूर्त रूप लिया है।

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 1979 के नर्मदा जल विवाद अधिकरण के अंतर्गत मानसून अवधि में उपलब्ध अधिशेष जल के उपयोग के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। अधिशेष जल के भंडारण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है। हमारा उद्देश्य मानसून के दौरान व्यर्थ बहने वाले अतिरिक्त पानी को संरक्षित कर प्रदेश के जलाभावग्रस्त क्षेत्रों की बढ़ती मांग को पूरा करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार और पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय से अंतरराज्यीय जल सहयोग के नए आयाम स्थापित हुए हैं। रामजल सेतु लिंक परियोजना , यमुना जल समझौता जैसे ऐतिहासिक समझौतों ने जलाभावग्रस्त क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद जगाई है। वहीं , राजस्थान , मध्यप्रदेश , गुजरात और महाराष्ट्र ने सहकारी संघवाद की भावना से नर्मदा परियोजना के अंतर्गत सराहनीय कदम उठाए हैं।

नर्मदा नहर परियोजना जल दक्षता का अनूठा मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान ने नर्मदा नहर परियोजना के अंतर्गत जल दक्षता का अनूठा मॉडल स्थापित किया है। जालोर और बाड़मेर जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों तक इस परियोजना में सम्पूर्ण कमांड क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई पद्धति को अनिवार्य करने की पहल की गई है। इस सूक्ष्म सिंचाई तकनीक से पानी की छीजत नगण्य हुई है। साथ ही , 2.46 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड क्षेत्र में निर्धारित 40 प्रतिशत सिंचाई सघनता के लक्ष्य को कुशलतापूर्वक प्राप्त किया जा रहा है। किसानों की फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। यह पहल पूरे देश के लिए कुशल जल संरक्षण और उपयोग की उत्कृष्ट मिसाल है।

उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं , बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव है। राजस्थान जैसे मरुस्थलीय प्रदेश में जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं , बल्कि विकास , अर्थव्यवस्था , कृषि , पशुपालन और जनजीवन की जीवनरेखा है। विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में पेयजल और सिंचाई के लिए जल की सुनिश्चित उपलब्धता राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री , गुजरात , मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों का सकारात्मक सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

रवीन्द्र

स्रोत: Times of Rajasthan

Source: Times of Rajasthan

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