Skip to content
हिन्दी
BREAKING

खास खबर : नोहर में BJP ने मुस्लिम उम्मीदवार को जिताया, बीकानेर में कांग्रेस ने मुस्लिम प्रत्याशी को हराया

Updated:

बीकानेर । बीकानेर संभाग में हुए निकाय चुनाव में दो जगह नतीजे और स्थानीय राजनीति चौंकाने वाली देखी गई । जहां नोहर में सिर्फ 2 पार्षदों वाली भाजपा ने मुस्लिम महिला हाजन खातून टाक को…

खास खबर : नोहर में BJP ने मुस्लिम उम्मीदवार को जिताया, बीकानेर में कांग्रेस ने मुस्लिम प्रत्याशी को हराया

बीकानेर । बीकानेर संभाग में हुए निकाय चुनाव में दो जगह नतीजे और स्थानीय राजनीति चौंकाने वाली देखी गई ।

जहां नोहर में सिर्फ 2 पार्षदों वाली भाजपा ने मुस्लिम महिला हाजन खातून टाक को अध्यक्ष बनाया, बीकानेर में कांग्रेस के बहुमत के बावजूद मुस्लिम प्रत्याशी नसीम बानो उपमहापौर नहीं बन सकीं—क्या यह महज संयोग है या बदलते स्थानीय राजनीतिक समीकरण का संकेत?

राजस्थान के हालिया निकाय चुनावों में नोहर और बीकानेर के दो घटनाक्रमों ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ नोहर में भाजपा ने बेहद कमजोर संख्या बल के बावजूद मुस्लिम महिला हाजन खातून टाक को नगरपालिका अध्यक्ष बनाने में सफलता हासिल की, वहीं दूसरी तरफ बीकानेर में कांग्रेस के बहुमत वाले निगम में उसकी मुस्लिम प्रत्याशी नसीम बानो उपमहापौर का चुनाव हार गईं।

नोहर में भाजपा के पास सिर्फ दो सीटें, फिर भी मुस्लिम महिला बनी अध्यक्ष

नोहर नगरपालिका के 40 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस को 20, भाजपा को केवल 2 और निर्दलीयों को 18 सीटें मिली थीं। सामान्य राजनीतिक गणित कांग्रेस के पक्ष में था।

लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा समर्थित हाजन खातून टाक ने 20 वोट हासिल किए और कांग्रेस के सुमित चाचाण को भी 20 वोट मिले। बराबरी के बाद लॉटरी में हाजन खातून टाक के नाम की पर्ची निकल गई और वह अध्यक्ष निर्वाचित हो गईं।

यहां सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक तथ्य यह है कि हाजन खातून टाक ने अपना वार्ड निर्दलीय के रूप में जीता था और बाद में भाजपा ने उन्हें अध्यक्ष पद के लिए समर्थन दिया। भाजपा के दो पार्षदों से 20 वोट तक पहुंचने में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक रही।

बीकानेर में कहानी बिल्कुल उलट..

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने महापौर चुनाव में 50 वोट हासिल कर अनिल कल्ला को जीत दिलाई। यह आंकड़ा कांग्रेस की मूल ताकत से भी अधिक था।

लेकिन अगले ही दिन उपमहापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नसीम बानो को 38 वोट मिले, जबकि भाजपा के पंकज गहलोत 40 वोट लेकर विजयी हो गए।

यानी जिस निगम में कांग्रेस ने एक दिन पहले 50 वोट लेकर महापौर बनाया, उसी निगम में उसकी मुस्लिम प्रत्याशी को 38 वोट ही मिले और भाजपा ने उपमहापौर पद पर कब्जा कर लिया।

सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल...

नोहर में भाजपा ने एक मुस्लिम महिला उम्मीदवार को अपना समर्थन देकर सत्ता तक पहुंचाया। दूसरी ओर बीकानेर में कांग्रेस के बहुमत वाले निगम में मुस्लिम महिला प्रत्याशी चुनाव हार गईं।

इस तुलना का राजनीतिक संदेश क्या है?

क्या पार्टियों की मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर रणनीति केवल टिकट देने तक सीमित है, या फिर अप्रत्यक्ष चुनाव में उम्मीदवार के पीछे पूरा संगठन और पार्षदों का समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण है?

बीकानेर में महापौर और उपमहापौर चुनाव के बीच कांग्रेस के वोटों में 12 वोट का अंतर आया। चुनाव परिणामों में यह स्पष्ट है कि नसीम बानो को 38 और पंकज गहलोत को 40 वोट मिले। हालांकि किस पार्षद ने किसे वोट दिया, यह गोपनीय मतदान होने के कारण परिणाम से निर्धारित नहीं किया जा सकता।

डॉ. कल्ला की भूमिका के बीच भी सवाल

बीकानेर कांग्रेस की स्थानीय राजनीतिक कमान डॉ. बीडी कल्ला के हाथों में होने के संदर्भ में यह परिणाम पार्टी के लिए और महत्वपूर्ण हो जाता है। महापौर चुनाव में कांग्रेस ने 50 वोट जुटाकर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई, लेकिन अगले ही चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशी के पक्ष में वही एकजुटता कायम नहीं रह सकी। यही अंतर अब कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर रहा है—अगर पार्टी 50 पार्षदों का समर्थन महापौर चुनाव में जुटा सकती थी, तो उपमहापौर चुनाव में उसके प्रत्याशी के वोट 38 तक क्यों सिमट गए?

इसे सीधे तौर पर मुस्लिम प्रत्याशी के कारण हुई क्रॉस वोटिंग कहना संभव नहीं है, क्योंकि मतदान गोपनीय था। लेकिन महापौर और उपमहापौर के वोटों में आया अंतर राजनीतिक विश्लेषण का विषय जरूर है।

नोहर ने भाजपा को दिया संदेश, बीकानेर ने कांग्रेस से पूछे सवाल...

नोहर का चुनाव बताता है कि कम संख्या बल के बावजूद भाजपा ने निर्दलीयों को साथ लेकर मुकाबला बराबरी तक पहुंचाया और अंततः लॉटरी से मुस्लिम महिला प्रत्याशी को अध्यक्ष बनवा दिया।

बीकानेर का घटनाक्रम दूसरी तस्वीर पेश करता है—कांग्रेस के पास महापौर चुनाव में मजबूत समर्थन था, लेकिन मुस्लिम प्रत्याशी के उपमहापौर चुनाव में उतरते ही परिणाम उसके पक्ष में नहीं आया।

इसलिए राजस्थान की स्थानीय राजनीति में अब चर्चा सिर्फ भाजपा बनाम कांग्रेस की नहीं है। सवाल यह भी है कि कौन-सी पार्टी मुस्लिम प्रतिनिधित्व को राजनीतिक रूप से कितनी मजबूती से अपने पक्ष में खड़ा कर पाती है।

नोहर में भाजपा ने मुस्लिम उम्मीदवार को सत्ता तक पहुंचाया और बीकानेर में कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार को सत्ता नहीं दिला सकी—इन दो घटनाओं के बीच का राजनीतिक अंतर आने वाले दिनों में कांग्रेस की रणनीति और भाजपा की स्थानीय चुनावी राजनीति, दोनों के लिए चर्चा का विषय बना रहेगा।

Share

Comments

0 / 1200

Comments close 30 days after publication.

Related News