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Bikaner News : बीकानेर में सफाई को लेकर महापौर कल्ला का ‘एक्टिव मोड’: नई शुरुआत या पुरानी व्यवस्था की नई ब्रांडिंग?

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बीकानेर। नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर अनिल कल्ला पदभार संभालने के बाद सफाई व्यवस्था को लेकर खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं। वे शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंच रहे हैं, सफाई…

Bikaner News : बीकानेर में सफाई को लेकर महापौर कल्ला का ‘एक्टिव मोड’: नई शुरुआत या पुरानी व्यवस्था की नई ब्रांडिंग?

Highlights

  1. व्यवस्था नई नहीं, प्रस्तुति जरूर नई
  2. सवाल यह कि क्या व्यवस्था बदली है या सिर्फ उसका प्रचार-प्रसार बदला है?
  3. ‘एक्टिव मेयर’ की छवि बनाने की कोशिश?

बीकानेर। नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर अनिल कल्ला पदभार संभालने के बाद सफाई व्यवस्था को लेकर खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं। वे शहर के अलग-अलग इलाकों में पहुंच रहे हैं, सफाई कर्मचारियों के साथ मैदान में उतर रहे हैं और रात्रिकालीन सफाई अभियान का शुभारंभ कर रहे हैं। खुद महापौर ने भी सफाई को अपनी प्राथमिकता बताते हुए शहर को स्वच्छ बनाने की बात कही है।

लेकिन इस सक्रियता के बीच बीकानेर की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में एक दूसरा सवाल भी उठ रहा है—क्या रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था वास्तव में महापौर अनिल कल्ला के कार्यकाल में पहली बार शुरू हुई है?

व्यवस्था नई नहीं, प्रस्तुति जरूर नई -नगर निगम की सफाई व्यवस्था में रात्रिकालीन काम पहले से ही प्रावधान का हिस्सा रहा है। निगम द्वारा आवश्यकता पड़ने पर रात्रिकालीन और अवकाश के दिनों में सफाई कार्य करवाया जााता रहा है।

यानी रात्रिकालीन सफाई को पूरी तरह नई व्यवस्था के तौर पर पेश करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। फर्क यह जरूर है कि नई राजनीतिक टीम ने इसे ज्यादा दृश्यात्मक और सार्वजनिक तरीके से सामने रखा है।

महापौर का सफाई कर्मचारियों के साथ सड़क पर उतरना, झाड़ू लगाना और मोहल्लों में जाकर व्यवस्था का निरीक्षण करना जनता को यह संदेश देता है कि नई नगर निगम टीम सफाई को लेकर गंभीर है। यही इस पूरी कवायद का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व भी है।

‘एक्टिव मेयर’ की छवि बनाने की कोशिश?

महापौर बनने के बाद अनिल कल्ला ने सार्वजनिक रूप से कहा कि सफाई उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने बीकानेर को स्वच्छ और सुंदर बनाने तथा सभी 80 वार्डों में बेहतर काम करने की बात कही है।

इसके बाद उनका सीधे सड़कों और मोहल्लों में उतरना स्वाभाविक रूप से ‘एक्टिव मेयर’ की छवि बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।

हालांकि इसे केवल प्रचार कहना भी जल्दबाजी होगी। नई टीम को काम संभाले अभी कुछ ही दिन हुए हैं। इसलिए असली कसौटी यह होगी कि कैमरों और उद्घाटनों के बाद सफाई व्यवस्था कितने दिनों तक लगातार और प्रभावी रहती है।

एक दिन की झाड़ू से नहीं बदलेगी तस्वीर-इस सवाल को और गंभीर इसलिए होना पड़ता है क्योंकि हाल ही में मोहता चौक और मूर्ति सर्किल जयनारायण व्यास कॉलोनी पर महापौर द्वारा सफाई अभियान शुरू किए जाने के अगले दिन उसी स्थान पर कचरे के ढेर देखने केो मिले तो अभियान चलाने पर प्रश्न चिन्ह लगेगा ।

अगर किसी स्थान पर रात को विशेष सफाई अभियान चलाया गया और अगले दिन फिर वही कचरा दिखाई देने लगा, तो समस्या केवल झाड़ू लगाने की नहीं है। समस्या है—

  • कचरा संग्रहण की नियमितता,

डोर-टू-डोर कलेक्शन,

  • कचरा डालने के स्थानों की निगरानी,

  • सफाई कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता,

  • नालियों और मुख्य बाजारों की नियमित सफाई,

  • सबसे महत्वपूर्ण, पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग।

  • असली परीक्षा 80 वार्डों में होगी-बीकानेर नगर निगम में 80 वार्ड हैं। इसलिए महापौर की सक्रियता का मूल्यांकन किसी एक मोहल्ले या एक रात के अभियान से नहीं बल्कि पूरे शहर की लगातार बदलती तस्वीर से होना चाहिए। महापौर का मोहल्लों में जाना अच्छी प्रशासनिक पहल हो सकती है, लेकिन इसका वास्तविक असर तब माना जाएगा जब आम नागरिकों को यह महसूस हो कि: “कचरा पहले से जल्दी उठ रहा है, सड़कें साफ हैं, नालियां नियमित साफ हो रही हैं और शिकायत करने के बाद कार्रवाई होती है।”

    ‘शुभारंभ’ से आगे बढ़ना होगा-बीकानेर की सफाई व्यवस्था लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। जुलाई 2026 में भी शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों की कमी और अव्यवस्था संबंधी रिपोर्ट सामने आई थी।

    ऐसे में नई महापौर टीम के सामने चुनौती सिर्फ रात्रिकालीन सफाई का शुभारंभ करने की नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी, जवाबदेह और नियमित बनाने की है। इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि रात्रिकालीन सफाई किसने शुरू की? सवाल यह होना चाहिए कि रात्रिकालीन सफाई कितनी प्रभावी हुई?

    और उससे भी बड़ा सवाल—

    क्या बीकानेर की सड़कों पर अगले छह महीने बाद भी सफाई के लिए महापौर को खुद झाड़ू लेकर उतरना पड़ेगा, या निगम की व्यवस्था इतनी मजबूत हो जाएगी कि सफाई अपने आप नियमित रूप से होती रहेगी?

    कुल मिलाकर इसे महापौर अनिल कल्ला की शुरुआती सक्रियता को दो नजरियों से देखा जा सकता है। एक तरफ यह नई महापौर टीम की जमीनी स्तर पर काम करने की कोशिश है, दूसरी तरफ पुरानी व्यवस्थाओं को नए राजनीतिक पैकेज में पेश करने की कोशिश । फिलहाल फैसला करना जल्दबाजी होगा कि यह ‘अति उत्साह’ है या वास्तविक सक्रियता। इसका जवाब आने वाले दिनों में बीकानेर की सड़कों, मोहल्लों और बाजारों की सफाई व्यवस्था देगी। क्योंकि नगर निगम में सफाई का असली रिपोर्ट कार्ड झाड़ू की तस्वीर नहीं, अगले दिन सड़क पर दिखाई देने वाली तस्वीर होती है।

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