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कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद, प्रीमियम ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत

लेखक Administratorसंपादन: Piyush purohit

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नई दिल्ली। भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार में 2026 की दूसरी छमाही के दौरान निवेश और लीजिंग गतिविधियों के मजबूत बने रहने की उम्मीद है। खासकर दिल्ली-NCR, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे…

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कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद, प्रीमियम ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत

नई दिल्ली। भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार में 2026 की दूसरी छमाही के दौरान निवेश और लीजिंग गतिविधियों के मजबूत बने रहने की उम्मीद है। खासकर दिल्ली-NCR, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख बाजारों में गुणवत्तापूर्ण ऑफिस स्पेस, बेहतर कनेक्टिविटी और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की मांग बाजार को गति दे सकती है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार कंपनियां अपने ऑफिस पोर्टफोलियो का विस्तार करने के साथ-साथ बेहतर लोकेशन और आधुनिक सुविधाओं वाले कार्यालयों को प्राथमिकता दे रही हैं।

पहली छमाही में रिकॉर्ड ऑफिस डिमांड

2026 की पहली छमाही में देश के ऑफिस रियल एस्टेट बाजार ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया। CBRE के अनुसार जनवरी से जून के बीच ऑफिस स्पेस की कुल एब्जॉर्प्शन करीब 45.5 मिलियन वर्गफुट रही, जो किसी भी छमाही के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसी अवधि में करीब 32 मिलियन वर्गफुट नई ऑफिस सप्लाई बाजार में आई।

यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनियों की ऑफिस स्पेस की जरूरत लगातार बनी हुई है और हाइब्रिड वर्किंग के बावजूद फिजिकल ऑफिस की भूमिका खत्म नहीं हुई है।

दिल्ली-NCR में मजबूत मांग

दिल्ली-NCR कमर्शियल रियल एस्टेट के प्रमुख केंद्रों में बना हुआ है। 2026 की दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में ऑफिस लीजिंग करीब 3.55 मिलियन वर्गफुट रही। गुरुग्राम ने सबसे बड़ी हिस्सेदारी हासिल की, जबकि नोएडा और दिल्ली के प्रमुख कारोबारी इलाकों में भी अच्छी मांग देखने को मिली।

JLL के अनुसार दूसरी छमाही में दिल्ली-NCR के प्राइम लोकेशन पर करीब 3.8 से 4.3 मिलियन वर्गफुट ऑफिस लीजिंग होने का अनुमान है। बेहतर ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी, प्रीमियम ऑफिस प्रोजेक्ट और मजबूत किरायेदार मांग इसके प्रमुख आधार हैं।

फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की मांग तेजी से बढ़ी

कमर्शियल रियल एस्टेट में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव फ्लेक्सिबल और को-वर्किंग ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग है। दिल्ली-NCR में दूसरी तिमाही के दौरान फ्लेक्स ऑपरेटरों ने करीब 1.6 मिलियन वर्गफुट ऑफिस स्पेस लीज किया, जो क्षेत्र की कुल ऑफिस लीजिंग का लगभग 45 प्रतिशत था। यह दिल्ली-NCR में फ्लेक्स स्पेस की अब तक की सबसे बड़ी तिमाही लीजिंग बताई गई है।

कंपनियां अब लंबे समय के पारंपरिक लीज समझौतों के साथ-साथ ऐसे ऑफिस मॉडल पसंद कर रही हैं, जहां जरूरत के अनुसार जगह बढ़ाई या घटाई जा सके।

GCC और बड़ी कंपनियां बनीं मांग की बड़ी वजह

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के विस्तार से भी ऑफिस रियल एस्टेट को बड़ा सहारा मिल रहा है। CBRE के मुताबिक 2026 की पहली छमाही में GCCs ने करीब 19.6 मिलियन वर्गफुट ऑफिस स्पेस लीज किया, जो कुल H1 लीजिंग का लगभग 43 प्रतिशत था।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अलावा IT, BFSI, कंसल्टिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां भी आधुनिक ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ा रही हैं।

निवेशकों की नजर प्रीमियम संपत्तियों पर

बाजार में अब केवल अधिक ऑफिस स्पेस उपलब्ध कराने के बजाय क्वालिटी और लोकेशन पर ज्यादा जोर है। अच्छी कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाओं, ऊर्जा दक्षता और ग्रीन सर्टिफिकेशन वाले प्रोजेक्ट निवेशकों और कॉरपोरेट किरायेदारों की प्राथमिकता बन रहे हैं।

2026 की पहली छमाही में भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में इक्विटी कैपिटल इनफ्लो 8.5 अरब डॉलर तक पहुंचा, जो किसी छमाही में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह निवेश पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 32 प्रतिशत अधिक रहा।

कनेक्टिविटी बनेगी बड़ा फैक्टर

कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग में अब केवल शहर का नाम पर्याप्त नहीं है। मेट्रो, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और प्रमुख कारोबारी केंद्रों से बेहतर कनेक्टिविटी वाले स्थान कंपनियों की पहली पसंद बन रहे हैं।

दिल्ली-NCR में गुरुग्राम, नोएडा एक्सप्रेसवे और दिल्ली एयरोसिटी जैसे क्षेत्रों में मजबूत गतिविधि इसका उदाहरण है। बेहतर कनेक्टिविटी से कर्मचारियों की आवाजाही आसान होने के साथ कंपनियों को प्रतिभाओं तक पहुंच बनाने में भी मदद मिलती है।

दूसरी छमाही में भी तेजी की उम्मीद

विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 की दूसरी छमाही में ऑफिस रियल एस्टेट बाजार में निवेश, लीजिंग और प्रीमियम ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत रह सकती है। हालांकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और कंपनियों की बदलती कार्यप्रणाली बाजार के लिए चुनौती बनी रह सकती है।

फिर भी कंपनियों का ऑफिस पोर्टफोलियो बढ़ाने का रुझान, GCC का विस्तार, फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की बढ़ती मांग और बेहतर कनेक्टिविटी वाले प्रोजेक्ट कमर्शियल रियल एस्टेट को मजबूत आधार दे रहे हैं।

स्रोत: NSI MEDIA

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