अन्नामलाई को आंध्र प्रदेश के रास्ते संसद के उच्च सदन में भेजने के पीछे भाजपा की बड़ी रणनीति !

नई दिल्ली,एनएसआई मीडिया। आंध्र प्रदेश से खाली होने वाली चार राज्यसभा सीटों को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। तेलुगु देशम पार्टी, जनसेना और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि अंतिम क्षण में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो इन्हीं नामों में से उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

सबसे अधिक चर्चा भारतीय जनता पार्टी की ओर से तमिलनाडु के चर्चित नेता के. अन्नामलाई के नाम को लेकर हो रही है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के समझौते के तहत भाजपा को एक सीट दी गई है और पार्टी नेतृत्व ने इस सीट के लिए अन्नामलाई के नाम पर मुहर लगा दी है। बताया जा रहा है कि दिल्ली नेतृत्व ने गठबंधन के अन्य सहयोगियों को भी इस फैसले की जानकारी दे दी है।

अन्नामलाई का नाम सामने आने के बाद यह मामला केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में भी यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई को आंध्र प्रदेश के रास्ते संसद के उच्च सदन में भेजने के पीछे भाजपा की बड़ी रणनीति हो सकती है। माना जा रहा है कि उन्हें भविष्य में केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है या राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी में बड़ी भूमिका सौंपी जा सकती है।

हम आपको याद दिला दें कि अन्नामलाई तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के बाद नयनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। उसी दौरान अन्नाद्रमुक और भाजपा के बीच गठबंधन भी हआ था। उस समय केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संकेत दिया था कि अन्नामलाई को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके बाद से लगातार यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्हें कौन-सा पद मिलेगा।

हाल के महीनों में अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं चलीं। कभी कहा गया कि उन्हें विधानसभा चुनाव में मौका मिलेगा, तो कभी यह चर्चा रही कि वह स्वयं चुनाव नहीं लड़ना चाहते। कुछ समय पहले उनके खेती करने, डेयरी फार्म शुरू करने और यहां तक कि अलग राजनीतिक दल बनाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं। इन सब अटकलों के बीच अब आंध्र प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने की संभावना ने नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।
इस तरह की भी चर्चाएं हैं कि प्रधानमंत्री मोदी अपने मंत्रिमंडल का शीघ्र विस्तार और फेरबदल करने वाले हैं और उस दौरान अन्नामलाई को मंत्री बनाया जा सकता है। इस तरह की भी चर्चाएं हैं कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की जल्द घोषित होने वाली राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची में अन्नामलाई को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

उधर, तेलुगु देशम पार्टी भी अपनी शेष सीटों के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने में जुटी हुई है। पार्टी की ओर से कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। वर्तमान में राज्यसभा सदस्य साना सतीश को दोबारा मौका मिलने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। पार्टी यदि अनुसूचित जाति वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का फैसला करती है तो वरिष्ठ नेता वरला रामैया का नाम आगे आ सकता है।

इसी तरह यदि पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जाती है तो पूर्व मंत्री और अनुभवी नेता यनमला रामकृष्णुडु का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल है। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े भाष्यम शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख भाष्यम रामकृष्ण भी राज्यसभा सीट के लिए सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। यदि पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय को प्रतिनिधित्व देना चाहे तो वर्तमान में सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के सलाहकार एमए शरीफ के नाम पर भी विचार किया जा सकता है।

जनसेना पार्टी की ओर से भी उम्मीदवार चयन को लेकर रोचक स्थिति बनी हुई है। पहले यह माना जा रहा था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लिंगमनेनी रमेश को राज्यसभा भेजा जाएगा, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। ताजा जानकारी के अनुसार उद्योगपति बंडारु नरसिंहराव का नाम तेजी से चर्चा में आया है। इसके साथ ही तेलुगु फिल्म जगत के एक चर्चित निर्माता को भी जनसेना की ओर से राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन चर्चाओं ने राजनीतिक और फिल्मी दोनों हलकों में उत्सुकता बढ़ा दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *