- “इस सम्मेलन का उद्देश्य हमारे शहरों के सामने आने वाली भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है”: श्री मनोहर लाल, माननीय केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री
- सात तकनीकी सत्रों में समावेशी, सुदृढ़ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार शहरों के निर्माण हेतु प्रमुख सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई
‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में शहरी प्रशासन , योजना और सेवाओं की आपूर्ति को मजबूत करने संबंधी व्यावहारिक सुझावों के साथ आज भुवनेश्वर में ‘राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026’ संपन्न हुआ।
समापन भाषण देते हुए , केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने भारत के शहरी विकास की ऐतिहासिक यात्रा और शहरी बुनियादी ढांचे एवं सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार के निरंतर प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “इस सम्मेलन का उद्देश्य हमारे शहरों के सामने आने वाली भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।” उन्होंने ‘अमृत’ , ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी’ और ‘पीएम स्वनिधि’ सहित विभिन्न राष्ट्रीय मिशनों के जरिए हुई प्रगति का उल्लेख किया। इन राष्ट्रीय मिशनों से जल एवं स्वच्छता संबंधी सेवाओं का विस्तार हुआ है , अपशिष्ट प्रबंधन बेहतर हुआ है , शहरी आवागमन सुदृढ़ हुआ है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। उन्होंने रोजगार केन्द्रों और सार्वजनिक परिवहन के निकट किफायती आवास की उपलब्धता , निर्माण कार्यों में चक्रीय दृष्टिकोण अपनाने , और पुराने कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निपटान के महत्व पर जोर दिया। इस बात का उल्लेख करते हुए कि देश के आधे से अधिक पुराने कचरे का निपटान किया जा चुका है , उन्होंने इन प्रयासों को जारी रखने और नए कचरे को जमा होने से रोकने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि भारत के शहरी बदलावों का समावेशी , टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार रहना सुनिश्चित हो सके।
