भारत की अंतरिक्ष यात्रा 1963 में केरल के थुम्बा से लॉन्च किए गए एक साउंडिंग रॉकेट के साथ जो शुरू हुई थी , वह अब एक प्रस्तावित ' भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन ' की ओर मुखातिब हो रही है। नई अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां इस प्रगति को गति दे रही हैं। इनमें पुन : प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (reusable launch vehicles), इलेक्ट्रिक , ग्रीन और परमाणु प्रणोदन (propulsion), और इन - ऑर्बिट सर्विसिंग सभी शामिल हैं। स्पेसडेक्स (SpaDeX) के माध्यम से , भारत कक्षा में दो अंतरिक्ष यानों की स्वायत्त डॉकिंग (autonomous docking) हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश भी बन गया है। ये प्रगति भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करती हैं। दूसरी तरफ इस बीच , गगनयान भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान लक्ष्य को भी आगे बढ़ा रहा है।
अंतरिक्ष विज्ञान और आज के लिए इसकी प्रासंगिकता
भारत की संगठित अंतरिक्ष गतिविधियां साल 1962 में डॉ. विक्रम ए. साराभाई के दृष्टिकोण के तहत भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) की स्थापना के साथ शुरू हुईं। पहला साउंडिंग रॉकेट 21 नवंबर 1963 को केरल के थुम्बा से लॉन्च किया गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का गठन 15 अगस्त 1969 को हुआ जिसने पूर्व में गठित INCOSPAR का स्थान लिया। इसे बाद में वर्ष 1972 में अंतरिक्ष विभाग के अधीन लाया गया।
