नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन के समापन सत्र में अपने संबोधन के दौरान , विकसित भारत @ 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए शहरी प्रशासन , योजना और वित्तपोषण में व्यापक सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
भारत में चल रहे जनसांख्यिकीय और शहरी बदलाव के व्यापक दायरे पर जोर देते हुए , श्री गौबा ने बताया कि भारत की जनसंख्या कई दशकों तक बढ़ती रहेगी और 2060 के आसपास लगभग 165 करोड़ पर स्थिर हो जाएगी। 2050 तक भारत की लगभग आधी आबादी के शहरी क्षेत्रों में रहने की उम्मीद है , जिससे शहरी जनसंख्या वर्तमान के लगभग 50 करोड़ से बढ़कर 85 करोड़ होने का अनुमान है। शहरी आबादी की बुनियादी ढांचे , आवास और मूलभूत सेवाओं से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए , शहरों की योजना बनाने , उनके प्रशासन और वित्तपोषण के तरीकों में एक बुनियादी बदलाव की ज़रुरत होगी।
उन्होंने शहरों को आर्थिक विकास के ऐसे केंद्र के रूप में बताया, जहाँ प्रतिभा , पूँजी और विचार एक साथ मिलते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में सुनियोजित शहरी बस्तियों का समृद्ध इतिहास होने के बावजूद , आज़ादी के बाद शहरों की काफी हद तक अनदेखी की गई। 2014 के बाद , स्मार्ट सिटीज़ , अमृत , प्रधानमंत्री आवास योजना , स्वच्छ भारत और शहरी आजीविका मिशन जैसे कई बड़े अभियानों के ज़रिए ठोस प्रयास किए गए हैं। शहरी क्षेत्र के लिए बजट आवंटन में 10 गुना की वृद्धि हुई है। मेट्रो रेल और बस प्रणालियों में लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश किया गया है।
