सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के महानिदेशक(केंद्रीय सांख्यिकी) डॉ. दलीप सिंह ने कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. दलीप सिंह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एकरूपता एवं तुलनीयता में सुधार के लिए संशोधित राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) श्रृंखला को अद्यतन राष्ट्रीय कार्यप्रणाली के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वर्ष 2022–23 का उल्लेख प्रस्तावित नए आधार वर्ष के रूप में किया और इस बात पर जोर दिया कि सूचकांक में औद्योगिक अर्थव्यवस्था में हो रहे परिवर्तनों को समुचित रूप से दर्शाने के लिए वस्तुओं की टोकरी को अपडेट करना आवश्यक है। उन्होंने प्रमुख एवं गौण खनिजों सहित औद्योगिक उत्पादों और खनिजों से संबंधित आंकड़ों की उपलब्धता एवं गुणवत्ता में सुधार करने तथा आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन के लिए उपयोग की जाने वाली प्रणालियों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण(एनआसी) 2025 को अपनाने, संबंधित सिफारिशों के अनुरूप गैस आपूर्ति, जल आपूर्ति, मल-जल निकासी एवं अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के उचित समावेशन तथा विविध प्रकृति वाले उत्पादों के लिए उपयुक्त मूल्य-आधारित विजन अपनाने सहित विभिन्न कार्यप्रणाली संबंधी पहलुओं के बारे में बात की। उन्होंने राज्यों को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के नियमित मासिक संकलन के लिए अपनी क्षमता मजबूत करने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया कि संशोधित सूचकांक श्रृंखला विश्वसनीय, समयबद्ध और तुलनात्मक हो।
आधार वर्ष को 2011–12 से संशोधित कर 2022–23 करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) वर्तमान औद्योगिक संरचना, विनिर्मित उत्पादों की विविधता में हुए बदलावों तथा उत्पादन के बदलते स्वरूप को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करे। यह सूचकांक औद्योगिक उत्पादन में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की निगरानी करने तथा आर्थिक विश्लेषण और नीतिगत निर्णयों के निर्माण में सहायता प्रदान करने वाला एक महत्त्वपूर्ण संकेतक है।
इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को आधार वर्ष संशोधन की प्रक्रिया के प्रमुख चरणों के संबंध में व्यावहारिक एवं कार्यप्रणाली संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करना है। इसमें वस्तुओं की टोकरी और कारखानों का चयन, मदों का समूहीकरण, भारांक आरेख तैयार करना, आंकड़ों के स्रोत तथा ‘अन्यत्र वर्गीकृत नहीं (एनईसी)’ श्रेणी में आने वाली मदों के निपटान जैसे विषय शामिल हैं। कार्यक्रम में राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण(एनआईसी) 2025 की समीक्षा, संशोधित राष्ट्रीय उत्पाद वर्गीकरण(एनपीसी) पर सुझाव, आंकड़ों के आदान-प्रदान की व्यवस्था तथा प्रतिस्थापन और आरोपण की पद्धतियों पर भी चर्चा की जाएगी।