समय पर चिकित्सीय सहायता , साक्ष्य-आधारित उपचार और परिवार का निरंतर सहयोग लोगों को नशीले पदार्थों की लत से उबरने और अपना जीवन फिर से संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
असम के कामरूप महानगरीय जिले के 31 वर्षीय अमित (बदला हुआ नाम) की यात्रा इस बात को दर्शाती है कि किस तरह समन्वित चिकित्सीय देखभाल एवं निरंतर पुनर्वास , दीर्घकालिक सुधार और समाज में फिर से शामिल होने की प्रक्रिया में सहायक साबित हो सकते हैं।
अमित एक स्नातक हैं और स्वरोजगार करते हैं। सुधार की उनकी यात्रा तब शुरू हुई , जब हेरोइन की जानलेवा ओवरडोज लेने के बाद उनकी हालत बहुत बिगड़ गई। उन्हें गुवाहाटी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया , जहां उन्हें सांस लेने में गंभीर समस्या हो रही थी और तत्काल चिकित्सीय सहायता की जरूरत थी। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान , उन्हें हेपेटाइटिस-सी होने का भी पता चला। ओपिओइड की लत ने उनके स्वास्थ्य और जीवन पर बहुत बुरा असर डाला था। इसलिए, समय रहते सही एवं व्यापक उपचार मिलना उनके लिए बेहद जरूरी हो गया था।
