- नई शिक्षा नीति हमारी संस्कृति और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने वाली -राज्यपाल
- राष्ट्र केवल भूभाग नहीं है, यह जीवन की सांस्कृतिक दृष्टि -विधानसभा अध्यक्ष
जयपुर, 28 अक्टूबर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की संस्कृति और परम्पराओं से जुड़ी है। इसके जरिए ही भारत के वास्तविक इतिहास से नई पीढ़ी को जानकारी मिल रही है। उन्होंने विनोबा भावे की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि आजादी के बाद सबसे पहले देश की शिक्षा पद्धति बदली जानी चाहिए थी। यह काम हुआ नहीं, पर नई शिक्षा नीति से इस दिशा में ऐतिहासिक पहल हुई है। यह हमारी संस्कृति और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने वाली है।
श्री बागडे बुधवार को पाथेय भवन में “संघ से राष्ट्रबोध: शताब्दी यात्रा के विभिन्न पड़ाव” पुस्तक लोकार्पण समारोह में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ देश के श्रेष्ठ नागरिक बनाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि बाल और किशोर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की आत्मा है। जो एक बार इससे जुड़ जाता है वह सदा राष्ट्र के लिए समर्पित होकर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि देश का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां के विकास के लिए संघ के कार्यकर्ता काम नहीं करते। संघ की 1925 में स्थापना के बाद नैतिकता, ईमानदारी और राष्ट्र के लिए किए कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि संघ जीवन से जुड़ी उदात्त दृष्टि देने वाला संगठन है।
